Sunday, 10 October 2021

आज नवरात्र का चौथा दिन, होती है मां कूष्मांडा की पूजा, जानिये देवी कूष्मांडा के मंत्र, व्रत कथा और आरती

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नवरात्रि में चौथे दिन देवी को कुष्मांडा के रूप में पूजा जाता है। मां का ये रूप बेहद ही शांत, सौम्य और मोहक है। इनकी आठ भुजाएं हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा कहते हैं । इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इस देवी का वाहन सिंह है।

कहते हैं जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब इन्हीं देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी। अतः ये ही सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति हैं। मां कूष्माण्डा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक मिट जाते हैं। इनकी भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है।


    देवी कूष्मांडा के मंत्र: 

या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्‍मांडा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।


ध्यान मंत्र- वन्दे वांछित कामर्थेचन्द्रार्घकृतशेखराम्।

सिंहरूढाअष्टभुजा कुष्माण्डायशस्वनीम्॥


व्रत कथा: पौराणिक मान्यता के मुताबिक मां कूष्मांडा से तात्पर्य है कुम्हड़ा। कहा जाता है कि संसार को दैत्यों के अत्याचार से मुक्त करने हेतु मां दुर्गा ने देवी कूष्मांडा का अवतार लिया था। इस देवी का वाहन सिंह है। संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं इसलिए इस देवी को कुष्मांडा।

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