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नई दिल्ली
जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों और गैर-मुस्लिमों पर हाल में हुए हमलों
के पीछे आईएसआई का सुनियोजित षडयंत्र है। माना जा रहा है कि एक बड़ी साजिश
कश्मीर में बड़े पैमाने पर अस्थिरता के लिए रची गई है। इसके तहत ही करीब 200
लोगों को लक्ष्य बनाकर हत्या (टारगेट किलिंग) करने की तैयारी थी। सेना और
सुरक्षाबलों द्वारा आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे जबरदस्त ऑपरेशन के
बावजूद पाकिस्तान की ओर से आतंकी गुटों को लगातार शह मिल रही है। घुसपैठ के
जरिये नए आतंकी भेजने का प्रयास भी जारी है।
खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने हाल ही
में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में कई आतंकी संगठनों के आकाओं से
मुलाकात की है। यह बैठक 21 सितंबर को हुई थी। भारतीय खुफिया एजेंसियों को
आईएसआई और आतंकी संगठनों के बीच हुई गोपनीय बैठक की कई कड़ियां मिली हैं।
सुरक्षा एजेंसियों ने इसे ध्यान में रखकर अलर्ट जारी कर दिया है।
खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसआई ने आतंकी संगठनों को जम्मू-कश्मीर
में हमले तेज करने को कहा है। खासतौर पर कश्मीरी पंडितों और गैर-मुस्लिमों
को निशाना बनाने को कहा गया है। आईएसआई ने बड़ी संख्या में आतंकियों को
जम्मू-कश्मीर में लॉन्च करने की साजिश भी रची है। साथ ही टारगेट किलिंग
बढ़ाने को कहा है। साजिश के तहत आम कश्मीरी पंडित, गैर मुस्लिम व पुलिस,
सुरक्षाबलों और खुफिया विभाग में काम कर रहे कश्मीरियों पर हमले करने को
कहा गया है। गैर-कश्मीरी लोगों और भाजपा-आरएसएस से जुड़े लोगों को भी
निशाना बनाने को कहा गया है।
हमलों के लिए आतंकियों ने अपनी भूमिका इस बार बदल ली है। जो ओवर ग्राउंड
वर्कर (ओजीडब्ल्यू) हमलों में आतंकियों की साजो सामान और सूचना आदि
पहुंचाने में मदद करते थे उनको हमलों और हत्या को अंजाम देने की जिम्मेदारी
दी गई है। जबकि आतंकी अब मददगार की भूमिका में पर्दे के पीछे से काम कर
रहे हैं। छोटे हथियारों से लक्षित हत्या का मकसद आतंकी गुटों और पाकिस्तान
को जिम्मेदारी से बचाना है। जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने गुमराह
करने वाली तस्वीर पेश की जा सके।
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