उत्तम प्रदेश समाचार : अन्तराष्ट्रीय

Breaking
Loading...
Menu

Friday, 22 October 2021

बांग्लादेश हिंसा: आखिरकार पकड़ा गया हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने वाला इकबाल

बांग्लादेश हिंसा: आखिरकार पकड़ा गया हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने वाला इकबाल

 

 ढाका 
बांग्लादेश के दुर्गा पूजा के पंडालों में हुए हमलों में और हिंसा मामले में बांग्लादेश की कोमिला पुलिस ने हिंसा भड़काने के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। ढाका ट्रिब्यून ने कोमिला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) फारुक अहमद का हवाला देते कहा कि बांग्लादेश पुलिस ने कोमिला और अन्य स्थानों पर हालिया हिंसा को भड़काने के लिए जिम्मेदार इकबाल हुसैन की पहचान के कुछ घंटों बाद उसे गुरुवार को कॉक्स बाजार से गिरफ्तार किया गया। पुलिस अधिकारी के अनुसार, आरोपी इकबार हुसैन को कल रात लगभग 10:10 बजे कॉक्स बाजार के शुगंधा समुद्र तट क्षेत्र से पकड़ा गया। इकबाल पर आरोप है कि उसने ही पहले इस्लामिक पवित्र पुस्तक कुरान को दुर्गा पूजा स्थल पर रखा था, जो हिंसा का कारण बना। बांग्लादेश के दुर्गा पूजा के पंडालों में हुए हमलों में कम से कम तीन लोगों की जान चली गई थी। 

गुरुवार को ही बांग्लादेश की कोमिला पुलिस ने दावा किया था कि सीसीटीवी में हिंसा भड़काने के पीछे जो व्यक्ति जिम्मेदार था, उसकी पहचान कर ली गई है। पुलिस ने इस मामले में 35 साल के इकबाल हुसैन से पूछताछ की थी और फिर बाद में गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले मंगलवारको बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के निर्देश देश के गृह मंत्री को दिए थे।। मंगलवार को उन्होंने गृहमंत्री से कहा था कि वह उन लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई शुरू करें, जिन्होंने धर्म का इस्तेमाल कर हाल में हिंसा भड़काई थीं। 
 
क्या है मामला
गौरतलब है कि बीते बुधवार से बांग्लादेश में हिंदुओं के मंदिरों पर हमले बढ़ गए हैं। दरअसल, इससे पहले दुर्गा पूजा समारोहों के दौरान सोशल मीडिया पर कथित तौर पर ईश निंदा करने वाला एक पोस्ट देखने को मिला था। शनिवार देर रात बांग्लादेश में एक भीड़ ने 66 मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया और कम से कम 20 मकानों को आग के हवाले कर दिया। वहीं स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक अलग-अलग हमलों में हिंदू समुदाय के छह लोग मारे गए हैं, लेकिन इस आंकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है।

Saturday, 16 October 2021

तालिबान से बचकर निकलीं 100 महिला फुटबॉल खिलाड़ी, परिवारों के साथ अफगानिस्तान से पहुंची कतर

तालिबान से बचकर निकलीं 100 महिला फुटबॉल खिलाड़ी, परिवारों के साथ अफगानिस्तान से पहुंची कतर

 



नई दिल्ली  
अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से महिलाएं खौफ में जी रही हैं। तालिबान महिलाओं के खिलाफ अपनी दमनकारी नीति के लिए जाना जाता है, यही कारण है नेशनल फुटबॉल टीम के सदस्यों समेत 100 महिला फुटबॉल खिलाड़ियों को अफगानिस्तान से निकाला गया है। गुरुवार को  फ्लाइट के जरिए उन्हें दोहा लाया गया है। कतर के सहायक विदेश मंत्री लोलवाह अल-खतर ने एक ट्वीट में कहा, "महिला खिलाड़ियों सहित लगभग 100 फुटबॉल खिलाड़ी और उनके परिवार बोर्ड में हैं।"


 बताया कि ग्रुप में कम से कम 20 राष्ट्रीय महिला टीम फुटबॉल खिलाड़ी शामिल हैं। निकलाने के साथ खिलाड़ियों को कोरोनो वायरस परीक्षण से गुजरने के लिए एक परिसर में ले जाया गया। यह साफ नहीं है कि वे कब तक कतर में रहेंगे।फुटबॉल की विश्व शासी निकाय फीफा, अफगानिस्तान से खिलाड़ियों को निकालने के लिए कतर सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के संघ, FIFPRO ने अगस्त में अफगानिस्तान महिला राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों के लिए काबुल से बाहर निकलने के लिए उड़ानों में सीट सुरक्षित करने में मदद की।

अगस्त में अफगान सरकार के गिरने के बाद तालिबान ने 20 साल बाद फिर देश पर अपना कब्जा कर लिया, जिसके बाद से महिला एथलीटों समेत सभी महिलाओं  की सुरक्षा के लिए चिंताएं उठाई गईं। अफ़ग़ान महिला फ़ुटबॉल टीम की पूर्व कप्तान, खालिदा पोपल ने अफगानिस्तान में खिलाड़ियों से अपने स्पोर्ट्स गियर को जलाने और तालिबान शासन के प्रतिशोध से बचने के लिए अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को हटाने का आग्रह किया था।
 
तालिबान के सत्ता में आने के बाद से देश की कई महिला फुटबॉल खिलाड़ी छिप गई हैं। उन्हें डर है कि अगर तालिबान को उनका पता चला तो वे उन्हें जिंदा नहीं छोड़ेंगे। अगस्त में तालिबान के देश पर कब्जा करने के तुरंत बाद, अफगानिस्तान की महिला राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की एक पूर्व खिलाड़ी फानूस बसीर भाग गई और उन्होंने कहा कि तालिबान शासन में उनका कोई भविष्य नहीं है।

उन्होंने कहा, "हमारे देश के लिए, हमारे भविष्य के लिए, अफगानिस्तान में महिलाओं के भविष्य के लिए हमारे बहुत सारे सपने थे। यह हमारा सबसे बुरा सपना था कि तालिबान आएंगे और पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लेंगे। महिलाओं के लिए कोई भविष्य नहीं है।" पिछले महीने, अफगानिस्तान की जूनियर राष्ट्रीय टीम की महिला खिलाड़ी सीमा पार करके पाकिस्तान चली गईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिलाओं को डरर था कि उनके अधिकारों पर कार्रवाई की जाएगी जिसके तहत लड़कियों ने हफ्तों तक छिपने का समय बिताया।

पाक फिर हुआ बेनकाब, जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमलों के पीछे ISI का हाथ

पाक फिर हुआ बेनकाब, जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमलों के पीछे ISI का हाथ

 

 नई दिल्ली 
जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों और गैर-मुस्लिमों पर हाल में हुए हमलों के पीछे आईएसआई का सुनियोजित षडयंत्र है। माना जा रहा है कि एक बड़ी साजिश कश्मीर में बड़े पैमाने पर अस्थिरता के लिए रची गई है। इसके तहत ही करीब 200 लोगों को लक्ष्य बनाकर हत्या (टारगेट किलिंग) करने की तैयारी थी। सेना और सुरक्षाबलों द्वारा आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे जबरदस्त ऑपरेशन के बावजूद पाकिस्तान की ओर से आतंकी गुटों को लगातार शह मिल रही है। घुसपैठ के जरिये नए आतंकी भेजने का प्रयास भी जारी है।


 खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने हाल ही में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में कई आतंकी संगठनों के आकाओं से मुलाकात की है। यह बैठक 21 सितंबर को हुई थी। भारतीय खुफिया एजेंसियों को आईएसआई और आतंकी संगठनों के बीच हुई गोपनीय बैठक की कई कड़ियां मिली हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इसे ध्यान में रखकर अलर्ट जारी कर दिया है। 

 खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसआई ने आतंकी संगठनों को जम्मू-कश्मीर में हमले तेज करने को कहा है। खासतौर पर कश्मीरी पंडितों और गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाने को कहा गया है। आईएसआई ने बड़ी संख्या में आतंकियों को जम्मू-कश्मीर में लॉन्च करने की साजिश भी रची है। साथ ही टारगेट किलिंग बढ़ाने को कहा है। साजिश के तहत आम कश्मीरी पंडित, गैर मुस्लिम व पुलिस, सुरक्षाबलों और खुफिया विभाग में काम कर रहे कश्मीरियों पर हमले करने को कहा गया है। गैर-कश्मीरी लोगों और भाजपा-आरएसएस से जुड़े लोगों को भी निशाना बनाने को कहा गया है।
 
 हमलों के लिए आतंकियों ने अपनी भूमिका इस बार बदल ली है। जो ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) हमलों में आतंकियों की साजो सामान और सूचना आदि पहुंचाने में मदद करते थे उनको हमलों और हत्या को अंजाम देने की जिम्मेदारी दी गई है। जबकि आतंकी अब मददगार की भूमिका में पर्दे के पीछे से काम कर रहे हैं। छोटे हथियारों से लक्षित हत्या का मकसद आतंकी गुटों और पाकिस्तान को जिम्मेदारी से बचाना है। जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने गुमराह करने वाली तस्वीर पेश की जा सके।

Saturday, 9 October 2021

चीन लड़ने ताइवान की सेना को गुप्त रूप से प्रशिक्षण दे रही अमेरिकी आर्मी

चीन लड़ने ताइवान की सेना को गुप्त रूप से प्रशिक्षण दे रही अमेरिकी आर्मी

 

ताइपे
दक्षिण चीन सागर में चीनी सेना की बढ़ती दादागिरी के बीच अब अमेरिका ने ड्रैगन को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी तेज कर दी है। अमेरिकी मीडिया में आई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यूएस आर्मी के ट्रेनर पिछले एक साल से ताइवान की सेना को गुपचुप तरीके से प्रशिक्षण दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिकी विशेष बलों के करीब 24 सैनिक और कई मरीन सैनिक ताइवान की सेना को ट्रेनिंग दे रहे हैं।

इस बड़े खुलासे से चीन और अमेरिका के बीच तनाव काफी बढ़ने के आसार तेज हो गए हैं। अमेरिकी अखबार वॉल स्‍ट्रीट जनरल ने ताइवान के सैनिकों को प्रशिक्षण देने का खुलासा किया है। इन प्रशिक्षकों को सबसे पहले ट्रंप प्रशासन ने ताइवान भेजा था लेकिन अभी तक उनकी उपस्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। यह खुलासा ऐसे समय पर हुआ है जब ताइवान की राष्‍ट्रपति त्‍साई इंग वेन ने शुक्रवार को कहा था कि ताइवान अपने लोकतांत्रिक जीवनशैली और स्‍वतंत्रता को बचाने के लिए जो जरूरी होगा, उसे करेगा।


'ताइवान अपनी स्‍वतंत्रता की रक्षा के लिए हर संभव उपाय करेगा'
ताइपे में ताइवानी राष्‍ट्रपति ने कहा, 'ताइवान चीन के साथ सैन्‍य संघर्ष नहीं चाहता है। ताइवान अपने पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण, स्‍थायी और आपसी फायदे वाले सहअस्तित्‍व की आशा करता है। लेकिन ताइवान अपनी स्‍वतंत्रता की रक्षा और लोकतांत्रिक जीवनशैली को बचाने के लिए जो भी जरूरी होगा, उसे वह करेगा।' बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना वर्ष 1979 के बाद से स्‍थायी रूप से ताइवान में मौजूद नहीं हैं। वर्ष 1979 में ताइवान के साथ अमेरिका ने अपना राजनयिक मिशन शुरू किया था।

पेंटागन के प्रवक्‍ता जॉन सूप्‍पल ने कहा कि वह इस खबर पर सीधे तौर पर प्रतिक्रिया नहीं देंगे लेकिन माना कि चीन के वर्तमान खतरे को देखते हुए ताइवान को अपनी रक्षा के लिए सहयोग जारी रहेगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र के मामलों के विशेषज्ञ जैकब स्‍टोक्‍स ने कहा, 'यह एक महत्‍वपूर्ण कदम है लेकिन यह मुख्‍य रूप से उकसावे वाला नहीं है बल्कि ताइवान की रक्षा क्षमता को बढ़ाएगा।' उन्‍होंने कहा कि अमेरिका इसे चुपचाप कर रहा है और इसका काफी महत्‍व है।


चीन ने अमेरिका को ताइवान पर दी है कड़ी चेतावनी
इससे पहले ताइवान ने खुलासा किया था कि अमेरिकी मरीन रैडर्स उसकी धरती पर मौजूद हैं। हालांकि उसने कहा कि यह ताइवान-अमेरिका सैन्‍य आदान- प्रदान का हिस्‍सा है और प्रशिक्षण में मदद कर रहे हैं। अमेरिका ने इस खबर को गलत बताया था। इससे पहले चीन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका से अनुरोध किया था कि वह ताइवान को सैन्‍य मदद देना बंद करे। उसने कहा कि चीन अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय एकजुटता की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।

दुन‍िया की पहली मलेरिया वैक्‍सीन को मिली मंजूरी, जाने इसके बारे में कैसे करता है काम

दुन‍िया की पहली मलेरिया वैक्‍सीन को मिली मंजूरी, जाने इसके बारे में कैसे करता है काम


नई दिल्ली 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुधवार को दुनिया की पहली मलेरिया वैक्सीन को स्‍वीकृति दे दी है। मच्छर इस बीमारी की वजह से एक वर्ष में 400,000 से अधिक लोगों को मारती है, जिनमें ज्यादातर अफ्रीकी बच्चे होते हैं। Mosquirix का टीका ब्रिटिश दवा निर्माता ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन द्वारा विकसित किया गया था। अफ्रीकी महाद्वीप में मलेरिया से हर दो मिनट में एक बच्चे की मौत होती है। इस वैक्सीन को सबसे पहले ब्रिटिश दवा निर्माता कंपनी ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन ने 1987 में बनाया था। आइए जानते है इस वैक्‍सीन से जुड़ी जरुरी बातें। 
मच्छर क्या है? 
यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी के अनुसार, मॉस्क्युरिक्स एक टीका है जो 6 सप्ताह से 17 महीने की उम्र के बच्चों को मलेरिया से बचाने में मदद करने के लिए दिया जाता है। यह हेपेटाइटिस बी वायरस से लीवर के संक्रमण से बचाने में भी मदद करता है, लेकिन यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी ने चेतावनी दी है कि टीके का उपयोग केवल इस उद्देश्य के लिए नहीं किया जाना चाहिए। 

वैक्सीन को 1987 में ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन द्वारा विकसित किया गया था। हालांकि, यह चुनौतियों का सामना करता है: मॉसक्विरिक्स को चार खुराक तक की आवश्यकता होती है, और इसकी सुरक्षा कई महीनों के बाद फीकी पड़ जाती है। फिर भी, वैज्ञानिकों का कहना है कि अफ्रीका में मलेरिया के खिलाफ टीके का बड़ा असर हो सकता है। 2019 के बाद से, घाना, केन्या और मलावी में WHO द्वारा समन्वित एक बड़े पैमाने पर पायलट कार्यक्रम में शिशुओं को Mosquirix की 2.3 मिलियन खुराक दी गई है। जिन लोगों को यह बीमारी होती है उनमें से अधिकांश पांच साल से कम उम्र के हैं।
 Mosquirix का उपयोग कैसे किया जाता है?
 Mosquirix को 0.5 मिली इंजेक्शन के रूप में जांघ की मांसपेशियों में या कंधे के आसपास की मांसपेशी (डेल्टॉइड) में दिया जाता है। बच्चे को प्रत्येक इंजेक्शन के बीच एक महीने के साथ तीन इंजेक्शन दिए जाते हैं।  Mosquirix केवल एक नुस्खे के साथ प्राप्त किया जा सकता है। मच्छर कैसे काम करता है? यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी के वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉस्क्युरिक्स में सक्रिय पदार्थ प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम परजीवी की सतह पर पाए जाने वाले प्रोटीन से बना होता है।

Thursday, 7 October 2021

पाकिस्तान में 6.0 तीव्रता से आया भूकंप , 20 लोगों के मरने की आशंका, 200 से अधिक घायल

पाकिस्तान में 6.0 तीव्रता से आया भूकंप , 20 लोगों के मरने की आशंका, 200 से अधिक घायल

   इस्लामाबाद

पाकिस्तान में गुरुवार तड़के तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए. इसमें कम-से-कम 20 लोगों के मरने की आशंका है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं. पाकिस्तान के क्वेटा के हरनेई इलाके में आए भूकंप की तीव्रता 5.7 आंकी गई है. इससे भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है.

मालूम हो कि रिक्टर स्केल पर भूकंप की 6 के आसपास की तीव्रता काफी मानी जाती है और इससे ठीक-ठाक नुकसान होने की आशंका बनी रहती है.

पाकिस्तान में यह भूकंप आज सुबह तकरीबन तीन बजे आया, जिसके बाद हड़कंप मच गया. घर में आराम से सो रहे लोगों ने  आनन-फानन में बाहर निकलकर बचने की कोशिश की. इसके अलावा, भूकंप से कई मकानों को भी नुकसान पहुंचा है. वहीं, डिजाजटर मैनेजमेंट के अधिकारियों का कहना है कि अभी मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है.  

राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी सुहैल अनवर हाशमी ने न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया कि छतों और दीवारों के गिरने से कई पीड़ितों की मौत हो गई. वहीं, सरकार के मंत्री मीर जिया उल्लाह ने कहा कि हमें सूचना मिल रही है कि भूकंप के कारण 20 लोग मारे गए हैं. बचाव-अभियान जारी है.

इलाके के डिप्टी कमिश्नर ने न्यूज एजेंसी को बताया कि भूकंप से कम से कम 200 लोग घायल हुए हैं और उन्होंने मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई है.

भूकंप के बाद सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें सामने आई हैं. लोग भूकंप के झटके के बाद सड़कों पर निकलते दिख रहे हैं. पाकिस्तान में तेज भूकंप के झटके बाद राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है. हादसे में घायल हुए लोगों को नजदीक के अस्पताल में भर्ती करवाया जा रहा है. 

ईरान अजरबैजान-इजरायल दोस्ती पर भड़का, बोला- यहूदियों की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं

ईरान अजरबैजान-इजरायल दोस्ती पर भड़का, बोला- यहूदियों की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं

 

तेहरान
ईरान ने अजरबैजान और इजरायल की दोस्ती को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि उसे काकेशस में इजरायल की मौजूदगी को लेकर गंभीर चिंताएं है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में यहां तक दावा किया गया है कि ईरान ने अजरबैजानी सेना के विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है। ईरान को बड़ी चिंता अपनी सीमा के नजदीक इजरायली हथियारों की मौजूदगी को लेकर है।

ईरान ने कहा- हमें जायोनीवादियों की मौजूदगी कबूल नहीं
ईरानी विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन ने मॉस्को में कहा कि हम निश्चित रूप से काकेशस में भू-राजनीतिक परिवर्तन और मानचित्र परिवर्तन को बर्दाश्त नहीं करेंगे। हमें इस क्षेत्र में आतंकवादियों और जायोनीवादियों (यहूदी देश के समर्थक) की उपस्थिति के बारे में गंभीर चिंता है। ईरान पहले भी इजरायल की मौजूदगी को लेकर चेतावनी दे चुका है।

ईरान और अजरबैजान में क्यों बढ़ा तनाव?
ईरान और अजरबैजान में तनाव बढ़ने के कई कारण है। पहला यह कि अजरबैजान ने हाल में ही ईरान सीमा के नजदीक पाकिस्तान और तुर्की के साथ मिलकर सैन्य अभ्यास किया था। दूसरा, अजरबैजान ने आर्मीनिया जाने वाले ईरानी ट्रकों के लिए रास्ते को बंद कर दिया था। इतना ही नहीं, अजरबैजान ने कुछ ईरानी ट्रक ड्राइवरों को हिरासत में भी लिया था। तीसरा, इजरायल और अजरबैजान में बढ़ती दोस्ती से भी ईरान चिढ़ा हुआ है।

ईरान बोला- इजरायल की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं
इसके जवाब में ईरान ने भी अजरबैजान से लगती सीमा पर भारी हथियारों को तैनात कर दिया है। ईरानी सेना ने भी इस इलाके में सैन्य अभ्यास शुरू किया है। इसी सैन्य अभ्यास के शुरू होने के पहले ईरानी विदेश मंत्री अमीर-अब्दुल्लाहियन ने अपने अजरबैजानी समकक्ष से कहा था कि ईरान हमारी सीमाओं के बगल में इजरायल की उपस्थिति या गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कोई भी आवश्यक कार्रवाई करने की कसम भी खाई।

शिया आबादी के बावजूद दोस्त नहीं है ईरान और अजरबैजान
ईरान और अजरबैजान की 700 किलोमीटर की सीमा है। अजरबैजान की बहुसंख्यक आबादी शिया है, इसके बावजूद उसके संबंध ईरान के साथ अच्छे नहीं है। वहीं, आर्मीनिया की बहुसंख्यक आबादी ईसाई है। फिर भी आर्मीनिया और ईरान के संबंध काफी अच्छे हैं। कोरोना महामारी के दौरान ईरान से बड़ी संख्या में लोग आर्मीनिया में वैक्सीन लगवाने पहुंचे थे।

क्या है काकेशस
काकेशस काला सागर और कैस्पियन सागर के बीच का क्षेत्र है। इसमें मुख्य रूप से आर्मीनिया, अजरबैजान, जॉर्जिया और दक्षिणी रूस का कुछ इलाका शामिल है। इसी इलाके में काकेशस पर्वतमाला भी स्थित है। इसे पूर्वी यूरोप और पश्चिम एशिया के बीच प्राकृतिक अवरोध माना जाता है। यूरोप का सबसे ऊंचा पर्वत माउंट एल्ब्रस 5642 मीटर (18,510 फीट) की ऊंचाई के साथ ग्रेटर काकेशस पर्वत श्रृंखला के पश्चिम भाग में स्थित है

Wednesday, 6 October 2021

पाकिस्तान और कतर तालिबान को मान्यता देने में रह सकते हैं सबसे आगे

पाकिस्तान और कतर तालिबान को मान्यता देने में रह सकते हैं सबसे आगे

 

नई दिल्ली
तालिबान की ओर से अफगानिस्तान पर कब्जा जमाने और नई सरकार के गठन के बाद भी उसे अभी तक विदेशी देशों से मान्यता मिलने का इंतजार है। सरकार के गठन के एक महिने से अधिक का समय हो चुका है लेकिन अभी तक कोई भी देश उसे मान्यता नहीं दे पाया है। लेकिन अब दुनिया के दो देश पाकिस्तान और कतर तालिबान कैबिनेट को मान्यता देने वाले पहले देश हो सकते हैं। घटनाक्रम से परिचित लोगों ने बताया कि अफगानिस्तान में अहम भूमिका निभाने वाला तुर्की अभी मान्यता नहीं देगा। तुर्की ने काबुल हवाई अड्डे को बहाल करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नाम न छापने की शर्त पर लोगों ने कहा कि पाकिस्तान और कतर तालिबान की अंतरिम कैबिनेट को मान्यता देने वाले पहले दो देश बन सकते हैं। जिम्मेदारियों के बंटवारे और सत्ता के बंटवारे को लेकर तालिबान के भीतर मतभेदों की खबरों के बाद दोनों देश अपने नेताओं को अफगानिस्तान भेजे हैं।

पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) एजेंसी के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज़ हमीद सितंबर की शुरुआत में तालिबान नेतृत्व के भीतर एक शासी व्यवस्था के गठन को लेकर मतभेदों की रिपोर्ट सामने आने के तुरंत बाद अफगानिस्तान पहुंचे थे। वहीं, कतर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी ने लगभग एक सप्ताह बाद काबुल का दौरा किया, और प्रधान मंत्री मोहम्मद हसन अखुंद सहित तालिबान के शीर्ष नेताओं के साथ बातचीत की। लोगों ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल हमीद ने काबुल में तालिबानी नेताओं को एक साथ लाने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें हक्कानी नेटवर्क और तालिबान के कंधार गुट के कट्टरपंथियों को अधिकांश महत्वपूर्ण पद दिए गए थे। बता दें कि पाकिस्तान और कतर दोनों तालिबान से जुड़ने के लिए विश्व समुदाय की पैरवी करते रहे हैं। अल-जजीरा के साथ हाल ही में एक साक्षात्कार में, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को काबुल में 'नई वास्तविकता' के साथ जुड़ना होगा और अफगानिस्तान की संपत्ति को अनफ्रीज करना होगा ताकि देश मानवीय संकट से निपट सके। इससे परिचित लोगों का कहना है कि तालिबानी सरकार को मान्यता देने के लिए तुर्की अभी और इंतजार करेगा। वो बारिकी से अफगानिस्तान पर नजर रख रहा है।

तालिबान हथियारों के साथ गुरुद्वारे में घुसे; कैमरे तोड़ कईयों को बंधक बनाया

तालिबान हथियारों के साथ गुरुद्वारे में घुसे; कैमरे तोड़ कईयों को बंधक बनाया

 

काबुल
अफगानिस्तान में कब्जा कर चुके तालिबान की असली सूरत लगातार सामने आ रही है। ताजा घटनाक्रम के मुताबिक, तालिबान के हथियार बंद लोगों ने काबुल स्थित करता परवन गुरुद्वारे पर हमला बोल दिया। यहां कई लोगों को बंदी बनाया गया है। काबुल का करता परवन गुरुद्वारा वही स्थान है, जहां सिखों के गुरू नानक देव जी आए थे।  इंडियन वर्ल्ड फोरम के अध्यक्ष पुनीत सिंह चंडोक ने एएनआई से बातचीत में कहा, " काबुल में एक बार फिर तालिबान के तमाम दावों की पोल खुली है। अज्ञात भारी हथियारों से लैस तालिबान अधिकारियों के एक समूह ने काबुल स्थित गुरुद्वारे में घुसकर कई लोगों को हिरासत में लिया है।" चंडोक ने कहा, हथियारबंद लोगों ने गुरुद्वारे में मौजूद समुदाय को हिरासत में ले लिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि तालिबान अधिकारियों ने गुरुद्वारे के सीसीटीवी कैमरों को भी तोड़ दिया। इसके अलावा गुरुद्वारे में भी तोड़फोड़ की गई है। हमले की खबर मिलने पर स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधन भी मौके पर पहुंचा।  करता परवन गुरुद्वारा अफगानिस्तान के उत्तर-पश्चिमी काबुल में स्थित है। इससे पहले, तालिबान ने अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांत स्थित गुरुद्वारे की छत से निशान साहिब-सिख पवित्र ध्वज को हटा दिया था। ये वही गुरुद्वारा है जहां एक बार सिखों के गुरू गुरु नानक देव जी ने भी दौरा किया था। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद यहां अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और बर्बरता की खबरे लगातार सामने आ रही हैं। तालिबान अल्पसंख्यकों की धार्मिक और जातीय पहचान के आधार पर हत्याएं कर रहा है।