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Friday, 22 October 2021

आज कन्हैया, हार्दिक व जिग्नेश आएंगे पटना, उपचुनाव वाली दोनों सीटों पर तीन-तीन दिन करेंगे प्रचार

आज कन्हैया, हार्दिक व जिग्नेश आएंगे पटना, उपचुनाव वाली दोनों सीटों पर तीन-तीन दिन करेंगे प्रचार

 

पटना

हाल ही में कांग्रेस का दामन थामने वाले युवा नेता कन्हैया कुमार, हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवानी बिहार दौरे पर शुक्रवार यानी 22 अक्टूबर को आ रहे हैं। तीनों नेता तीन-तीन दिन तारापुर और कुशेश्वरस्थान विधानसभा क्षेत्र में हो रहे उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे। वहीं, बिहार कांग्रेस प्रभारी भक्त चरणदास भी शुक्रवार को ही बिहार दौरे पर आ रहे हैं। दरअसल, उपचुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी ने अपने तीनों युवा नेताओं कन्हैया कुमार, जिग्नेश मेवानी और हार्दिक पटेल की तिकड़ी को चुनाव प्रचार में उतारने का निर्णय लिया है। कांग्रेस में शामिल होने के बाद तीनों नेता पहली बार बिहार आ रहे हैं। पार्टी ने तीनों नेताओं के चुनाव प्रचार का कार्यक्रम भी तय कर दिया है। प्रभारी के साथ तीनों नेता पटना आने के बाद सदाकत आश्रम जाएंगे। उस दिन सदाकत आश्रम में पार्टी नेताओं की बैठक होगी। राजनीतिक व सामाजिक क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण नेता उस दिन कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करेंगे। उसी दिन शाम में तीनों युवा नेता तारापुर के लिए रवाना हो जाएंगे। 23, 24 व 25 अक्टूबर को कन्हैया, जिग्नेश व हार्दिक पटेल तारापुर में चुनाव प्रचार करेंगे। इसके बाद 26, 27 और 28 अक्टूबर को कुशेश्वरस्थान विधानसभा क्षेत्र में तीनों नेता चुनाव प्रचार करेंगे। चुनाव 30 अक्टूबर को होना है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने जज को ठहराया महिला से रेप और धोखाधड़ी का दोषी

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने जज को ठहराया महिला से रेप और धोखाधड़ी का दोषी

 

जम्मू

जम्मू-कश्मीर में एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने महिला से बलात्कार और धोखाधड़ी के एक मामले में जज को दोषी ठहराया है। जम्मू में एक निलंबित उप-न्यायाधीश पर 2018 में उनसे कानूनी मदद मांगने वाली एक महिला से बलात्कार और धोखाधड़ी का आरोप लगा था। आरोप के बाद उप-न्यायाधीश को निलंबित कर दिया गया था। निलंबित सब जज की पहचान राकेश कुमार अबरोल के रूप में हुई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट जम्मू के पीठासीन अधिकारी खलील चौधरी ने अपने फैसले में कहा कि चर्चा से जो निष्कर्ष निकलता है, वह यह है कि रिकॉर्ड पर मौजूद सभी सबूत आरोपी के अपराध की ओर इशारा करते हैं। कोर्ट ने कहा कि घटनाओं और तथ्यों की पूरी श्रृंखला इस ओर इशारा करता है कि आरोपी द्वारा किए गए सभी अपराध मानवीय संभावनाओं के अंतर्गत किया गया था और रिकॉर्ड पर लाए गए और स्थापित सभी परिस्थितियां आरोपी के अपराध के अनुरूप हैं।

 

अदालत ने साक्ष्यों पर कहा कि यह पीड़िता के साथ बलात्कार के लिए पूरी तरह से उत्तरदायी प्रतीत होता है। इस प्रकार, उन्हें धारा 420 और 376 (2) (के) आरपीसी के तहत अपराधों के लिए दोषी ठहराया जाता है। कोर्ट में सजा पर शनिवार को सुनवाई होगी। अदालत ने आगे कहा प्रभावी व्यक्ति, उनकी पहुंच, प्रभाव और अधिकार को ध्यान में रखते हुए, वे आम जनता या उस विशिष्ट वर्ग पर होते हैं, जिससे वे संबंधित हैं और उन्हें अधिक जिम्मेदार होना चाहिए, उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अनुभव और ज्ञान के साथ अधिकार और कानून का अर्थ जानते हैं और समझते हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार रामबन निवासी पीड़ित महिला की और जज की मुलाकात उस समय हुई जब वह एक केस लड़ रही थी। न्यायिक अधिकारी होने के नाते, अबरोल ने कानूनी मदद का वादा किया और उससे घरेलू कार्यों में हाथ बटाने की बात कही। एक नाबालिग लड़की को सहारा देने के बाद महिला ने जज के घर काम करना शुरू कर दिया। जज ने महिला को उसकी बेटी को बेहतर शिक्षा देने का वादा भी किया। भियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी ने उसे 5000 रुपए प्रति माह वेतन देने का वादा भी किया था।

फ्री में चिकन न देने पर तोड़ दी टांग, सिंघु बॉर्डर से गिरफ्तार हुआ निहंग नवीन कुमार

फ्री में चिकन न देने पर तोड़ दी टांग, सिंघु बॉर्डर से गिरफ्तार हुआ निहंग नवीन कुमार

 

नई दिल्ली 
सिंघु बॉर्डर पर किसानों के मंच के पास निहंग सिखों द्वारा एक युवक की नृशंस हत्या का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि आज मुफ्त चिकन न देने पर एक मजदूर से मारपीट और टांग तोड़ने का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है। हरियाणा पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सोनीपत के सिंघु बॉर्डर पर मुफ्त में चिकन देने से मना करने पर एक मजदूर के साथ मारपीट करने और उसकी टांग तोड़ने के आरोप में एक निहंग नवीन कुमार को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। 
 
बता दें कि सिंघु बॉर्डर पर शुक्रवार को पंजाब के तरनतारन जिले के निवासी लखबीर सिंह (36) की हत्या कर दी गई। उसका शव धरना-प्रदर्शन स्थल से कुछ दूरी पर बैरिकेड से लटका मिला था। मृतक का एक हाथ कटा हुआ था। मृतक का संबंध निहंग समूह से बताया जाता है। हत्या की वजह एक धर्म ग्रंथ की बेअदबी को लेकर हुआ विवाद माना जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में केंद्र द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर हजारों की संख्या में किसान दिल्ली सीमा के तीन बिंदुओ- टिकरी, सिंघू और गाजीपुर- पर गत 10 महीने से प्रदर्शन कर रहे हैं। इन किसानों में अधिकतर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं। 

Saturday, 16 October 2021

दीपावली के पूर्व 2.51 लाख आवासहीन परिवारों को मिलेगी अपने आवास की सौगात



भोपाल

मध्यप्रदेश में आवास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का प्रभावी क्रियान्वयन करते हुए 21 लाख 5 हजार आवास बना लिए गए हैं। वित्त वर्ष 2021-22 में प्रदेश के कुछ जिलों में अतिवृष्टि के बावजूद वर्षाकाल की तिमाही में सबसे ज्यादा एक लाख 60 हजार आवास बना लिए गए। योजना में मध्यप्रदेश को मिले 26.28 लाख आवास गृह बनाने के लक्ष्य के मुकाबले प्राप्त उपलब्धि संतोषजनक ही नहीं गरीबों को आवास गृह दिलवाने की दृष्टि से सराहनीय भी है। उल्लेखनीय बात यह है कि मध्यप्रदेश की तीन विशेष पिछड़ी जनजातियों बैगा, सहरिया और भारिया के लोगों के लिए भी विशेष परियोजना के अंतर्गत आवास गृह उपलब्ध करवाए गए हैं। जीर्ण-शीर्ण घरों में रहने वाले इन वर्गों के लोगों के लिए यह अकल्पनीय था कि उन्हें इतनी शीघ्र आवास गृह मिल जाएगा और दीपोत्सव वे नए घर में ही मना पाएंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2022 तक देश के सभी आवासहीन लोगों को आवास गृह उपलब्ध कराने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की पूर्ति में मध्यप्रदेश अच्छा कार्य कर रहा है। इस क्रम में आगामी सप्ताह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के 2 लाख 51 हजार हितग्राहियों को आवास गृह का एक साथ वर्चुअल गृह प्रवेश करवाएंगे। इस संबंध में आवश्यक तैयारियाँ की जा रही हैं। सबको आवास 2022 की लक्ष्य पूर्ति में मध्यप्रदेश ने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। जिन परिवारों को अपने मकान की सौगात मिली है, वे प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री चौहान के प्रति विशेष रूप से आभारी भी हैं। इस वर्ष दीपावली के पहले वे अपने नवनिर्मित आवास गृह में पहुँचने के लिए तैयार हो गए हैं। अब वे नए आवास गृह में ही दीपोत्सव मनाएंगे। मुख्यमंत्री चौहान का कहना है कि प्रदेश में हर गरीब परिवार को भूमि का पट्टा और पात्रतानुसार आवास निर्माण की राशि दी जाएगी।

कोरोना काल में भी नहीं रुका आवास बनाने का कार्य

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निरंतर समीक्षा करते हुए आवास योजनाओं के क्रियान्वयन की गति को बढ़ाने के साफ निर्देश दिए। इसके फलस्वरूप प्रदेश में कोरोना काल में भी आवास निर्माण का कार्य नहीं रूका। इस अवधि में 3 लाख से अधिक आवास गृह निर्मित किए गए। आमतौर पर एक आवास गृह के निर्माण के लिए औसतन 4 महीने का समय तय है, लेकिन पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने गरीबों के लिए पक्के मकान बनाने का कार्य तेजी से पूरा करते हुए एक माह के अल्प समय में 1 लाख आवास गृह बनाकर तैयार किए। आवास निर्माण की अवधि राष्ट्रीय स्तर पर 114 दिवस है। इस दृष्टि से मध्यप्रदेश में अच्छी गति के साथ आवास निर्माण के कार्य सम्पन्न हुए हैं। वर्षाकाल में यह संभव नहीं था लेकिन निर्माण एजेंसियों ने मनोयोगपूर्वक कार्य करते हुए इस उपलब्धि को हासिल किया है।

सॉफ्ट एप के माध्यम से हितग्राही के खाते में अंतरित होती है राशि

महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में उन लोगों को आवास गृह मिल गया है, जिनका अपना मकान नहीं था। योजना के प्रावधानों के अनुसार हितग्राही को मकान की इकाई लागत मैदानी क्षेत्र में एक लाख 20 हजार और दूरस्थ पहुँचविहीन दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में एक लाख 30 हजार रूपए शत-प्रतिशत अनुदान के रूप में प्रदान की जाती है। यह राशि आवास निर्माण के कार्य की प्रगति के आधार पर किश्तों के रूप में दी जाती है। हितग्राही द्वारा अपने मकान के निर्माण के लिए प्रदर्शित रूचि और परिश्रम के अच्छे परिणाम मिलते हैं। पूरा परिवार पक्के आवास गृह को पाकर अपने जीवन को सार्थक महसूस करता है। सॉफ्ट एप के माध्यम से जियो टेग, फोटो अपलोड होने पर स्वमेव हितग्राही के खाते में राशि का अंतरण हो जाता है। हितग्राही को किसी सरकारी दफ्तर का चक्कर नहीं लगाना पड़ता है। मकान के साथ ही स्वच्छ शौचालय का निर्माण किया जाता है। यही नहीं हितग्राही को उज्जवला योजना में एलपीजी गैस कनेक्शन भी प्रदान किया जाता है।

जरूरत पड़ी तो फिर करेंगे सर्जिकल स्ट्राइक-गृहमंत्री शाह




  नई दिल्ली

भारत के गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में दक्षिण गोवा के धारबंदोरा में नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखते हुए कहा था कि भारत की सीमाओं से छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अमित शाह ने कहा था कि भविष्य में भी जरूरत पड़ने पर भारत सर्जिकल स्ट्राइक करेगा.

अमित शाह ने कहा था, सर्जिकल स्ट्राइक के सहारे दुनिया को हम बता चुके हैं कि भारत अब आतंकी दुस्साहस को कबूल नहीं करेगा. 2016 में हमारे जवानों ने दुश्मन के घर में घुसकर सेना पर हमले का बदला लिया था, आगे भी ऐसा ही होगा और दहशतगर्दों को उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा जैसी उन्हें समझ आती है. अमित शाह के इस बयान के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की भी प्रतिक्रिया आई है.

'अमित शाह दे रहे हैं भड़काऊ बयान'

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सर्जिकल स्ट्राइक वाले बयान को भ्रामक करार दिया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "भारतीय गृहमंत्री द्वारा पाकिस्तान में कथित 'सर्जिकल स्ट्राइक' की धमकी वाले गैर जिम्मेदाराना और भड़काऊ बयान की कड़े शब्दों में निंदा करता है. भारत के गृहमंत्री का बयान बीजेपी-आरएसएस की खतरनाक प्रवृत्ति को उजागर करता है जिसका मकसद क्षेत्रीय तनाव पैदा करना है. पाकिस्तान से दुश्मनी वाले ये बयान उन्हें विचारधारा स्तर पर और पॉलिटिकल स्तर पर काफी फायदा पहुंचाते हैं."

'गंभीर मुद्दों से भटका रहे लोगों का ध्यान'

इस स्टेटमेंट में आगे लिखा था कि इस तरह के बयान भारत में फैल रहे आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर मानवाधिकारों के उल्लंघन से इंटरनेशनल कम्युनिटी का ध्यान भटकाने का काम करते हैं. पाकिस्तान ने हमेशा से ही इंटरनेशनल समुदाय का ध्यान भारत के इस खतरनाक प्लान की तरफ आकर्षित करने की कोशिश की है क्योंकि इसके तहत पाकिस्तानियों और कश्मीरियों को फंसाने की कोशिश की जाती रही है.

इसमें आगे लिखा था कि साल 2019 में भारत के बालाकोट दुस्साहस को लेकर पाकिस्तान ने तुरंत प्रतिक्रिया दी थी. ये साफ करता है कि भारतीय आक्रमण को रोकने के लिए हमारी सेना की तैयारी और क्षमता में कोई कमी नहीं थी.

बता दें कि अगले साल चुनाव के मद्देनजर अमित शाह गोवा पहुंचे थे. उन्होंने अपने संबोधन के दौरान गोवा के पूर्व सीएम मनोहर पर्रिकर को भी याद किया और कहा कि जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके में आतंकी हमले के बाद पहली बार सर्जिकल स्ट्राइक इस्तेमाल करने का श्रेय भी स्वर्गीय मनोहर पर्रिकर को जाता है.

Friday, 15 October 2021

बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है दशहरा



विजय दशमी या विजयादशमी अथवा दशहरा आश्विन शुक्ल दशमी को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह भारत का राष्ट्रीय त्योहार है। रामलीला में जगह-जगह रावण वध का प्रदर्शन होता है। क्षत्रियों के यहां शस्त्रों की पूजा होती है। ब्रज के मंदिरों में इस दिन विशेष दर्शन होते हैं। इस दिन नीलकंठ का दर्शन बहुत शुभ माना जाता है। यह त्योहार क्षत्रियों का माना जाता है। इसमें अपराजिता देवी की पूजा होती है। यह पूजन भी सर्वसुख देने वाला है। दशहरा या विजया दशमी नवरात्रि के बाद दसवें दिन मनाया जाता है। इस दिन राम ने रावण का वध किया था। रावण राम की पत्नी सीता का अपहरण कर लंका ले गया था। भगवान राम युद्ध की देवी मां दुर्गा के भक्त थे, उन्होंने युद्ध के दौरान पहले नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा की और दसवें दिन दुष्ट रावण का वध किया। इसके बाद राम ने भाई लक्ष्मण, भक्त हनुमान और बंदरों की सेना के साथ एक बड़ा युद्ध लड़कर सीता को छुड़ाया। इसलिए विजयादशमी एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण दिन है। इस दिन रावण, उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद के पुतले खुली जगह में जलाए जाते हैं। कलाकार राम, सीता और लक्ष्मण के रूप धारण करते हैं और आग के तीर से इन पुतलों को मारते हैं जो पटाखों से भरे होते हैं। पुतले में आग लगते ही वह धू-धू कर जलने लगता है और इनमें लगे पटाखे फटने लगते हैं और जिससे इनका अंत हो जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है…

दशहरा उत्सव की उत्पत्ति

दशहरा उत्सव की उत्पत्ति के विषय में कई कल्पनाएं की गई हैं। भारत के कतिपय भागों में नए अन्नों की हवि देने, द्वार पर धान की हरी एवं अनपकी बालियों को टांगने तथा गेहूं आदि को कानों, मस्तक या पगड़ी पर रखने के कृत्य होते हैं। अतः कुछ लोगों का मत है कि यह कृषि का उत्सव है। कुछ लोगों के मत से यह रणयात्रा का द्योतक है क्योंकि दशहरा के समय वर्षा समाप्त हो जाती है, नदियों की बाढ़ थम जाती है, धान आदि कोष्ठागार में रखे जाने वाले हो जाते हैं।

संभवतः यह उत्सव इसी दूसरे मत से संबंधित है। भारत के अतिरिक्त अन्य देशों में भी राजाओं के युद्ध प्रयाण के लिए यही ऋतु निश्चित थी। शमी पूजा भी प्राचीन है। वैदिक यज्ञों के लिए शमी वृक्ष में उगे अश्वत्थ (पीपल) की दो टहनियों (अरणियों) से अग्नि उत्पन्न की जाती थी। अग्नि शक्ति एवं साहस की द्योतक है, शमी की लकड़ी के कुंदे अग्नि उत्पत्ति में सहायक होते हैं, जहां अग्नि एवं शमी की पवित्रता एवं उपयोगिता की ओर मंत्रसिक्त संकेत हैं। इस उत्सव का संबंध नवरात्र से भी है क्योंकि इसमें महिषासुर के विरोध में देवी के साहसपूर्ण कृत्यों का भी उल्लेख होता है और नवरात्र के उपरांत ही यह उत्सव होता है।

रामलीला

दशहरा उत्सव में रामलीला भी महत्त्वपूर्ण है। रामलीला में राम, सीता और लक्ष्मण के जीवन के वृत्तांत का वर्णन किया जाता है। रामलीला नाटक का मंचन देश के विभिन्न क्षेत्रों में होता है। यह देश में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। बंगाल और मध्य भारत के अलावा दशहरा पर्व देश के अन्य राज्यों में क्षेत्रीय विषमता के बावजूद एक समान उत्साह और शौक से मनाया जाता है। उत्तरी भारत में रामलीला के उत्सव दस दिनों तक चलते रहते हैं और आश्विन माह की दशमी को समाप्त होते हैं, जिस दिन रावण एवं उसके साथियों की आकृति जलाई जाती है। इसके अतिरिक्त इस अवसर पर और भी कई प्रकार के कृत्य होते हैं, यथा हथियारों की पूजा, दशहरा या विजयादशमी से संबंधित वृत्तियों के औजारों या यंत्रों की पूजा।

पौराणिक मान्यताएं

इस अवसर पर कहीं-कहीं भैंसे या बकरे की बलि दी जाती है। भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व देशी राज्यों में, यथा बड़ोदा, मैसूर आदि रियासतों में विजयादशमी के अवसर पर दरबार लगते थे और हौदों से युक्त हाथी दौड़ते तथा उछलकूद करते हुए घोड़ों की सवारियां राजधानी की सड़कों पर निकलती थीं और जुलूस निकाला जाता था। प्राचीन एवं मध्य काल में घोड़ों, हाथियों, सैनिकों एवं स्वयं का नीराजन उत्सव राजा लोग करते थे।

वनस्पति पूजन

विजयदशमी पर दो विशेष प्रकार की वनस्पतियों के पूजन का महत्त्व है। एक है शमी वृक्ष, जिसका पूजन रावण दहन के बाद करके इसकी पत्तियों को स्वर्ण पत्तियों के रूप में एक-दूसरे को ससम्मान प्रदान किया जाता है। इस परंपरा में विजय उल्लास पर्व की कामना के साथ समृद्धि की कामना करते हैं। दूसरा है अपराजिता। यह पौधा अपने नाम के अनुरूप ही है। यह विष्णु को प्रिय है और प्रत्येक परिस्थिति में सहायक बनकर विजय प्रदान करने वाला है। नीले रंग के पुष्प का यह पौधा भारत में सुलभता से उपलब्ध है। घरों में समृद्धि के लिए तुलसी की भांति इसकी नियमित सेवा की जाती है। मेला दशहरा पर्व को मनाने के लिए जगह-जगह बड़े मेलों का आयोजन किया जाता है। यहां लोग अपने परिवार, दोस्तों के साथ आते हैं और खुले आसमान के नीचे मेले का पूरा आनंद लेते हैं। मेले में तरह-तरह की वस्तुएं, चूडि़यों से लेकर खिलौने और कपड़े बेचे जाते हैं। इसके साथ ही मेले में व्यंजनों की भी भरमार रहती है।

Saturday, 9 October 2021

यूपी-बिहार के लिए त्योहारों पर चलेंगी 78 ट्रेन

यूपी-बिहार के लिए त्योहारों पर चलेंगी 78 ट्रेन

 

 नई दिल्ली 
दीवाली और छठ को लेकर उत्तर रेलवे का एक्शन प्लान तैयार है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक त्योहारों पर बिहार व उत्तर प्रदेश के लिए 78 रेलगाड़ियां चलाई जाएंगी। वहीं कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने और भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए प्लेटफार्म पर 30 मिनट पहले तक ट्रेन लगाई जाएंगी, जिससे यात्रियों को चढ़ने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। त्योहारों के समीप व्यस्त समय में जब रेलवे स्टेशनों पर सबसे अधिक भीड़ होगी तो 29 अक्टूबर से 10 नवंबर के बीच एक्शन प्लान लागू होगा। रेलवे अधिकारियों के स्पष्ट निर्देश हैं कि त्योहारों के समय एक बार तय करने के बाद ट्रेन का प्लेटफार्म बदला नहीं जाए। उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल के अधिकारियों के मुताबिक त्येहारों के समय नई दिल्ली स्टेशन पर पूर्वी क्षेत्र में जाने वाली सभी ट्रेन प्लेटफार्म नंबर 16 और आनंद विहार पर प्लेटफार्म नंबर 1 से चलेंगी। यह दोनों प्लेटफार्म गेट के पास पड़ते हैं। 

ऐसे में यात्रियों का ट्रेन तक पहुंचना आसान होगा। दिल्ली मंडल रेल प्रबंधक डिम्पी गर्ग के मुताबिक स्टेशन पर कोरोना संक्रमण के तमाम नियमों और शर्तों का पालन किया जाएगा। स्टेशनों पर सैनेटाइजेशन की व्यवस्था की गई है। यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग होगी। सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए बैठने व खड़े रहने के लिए भी निशान बनाएं गए हैं। 
 
मिनी कंट्रोल रूम होगा तैयार
नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली व आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर मिनी कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। मिनी कंट्रोल रूम में ऑपरेशन, कमर्शियल, इलेक्ट्रिकल समेत सभी विभाग के रेलवे कर्मचारी चौबीस घंटे तैनात रहेंगे। जो किसी प्रकार की शिकायत होने पर त्वरित कार्रवाई करेंगे। प्रत्येक स्टेशन पर एक स्पेशल ड्यूटी ऑफिसर इंचार्ज होगा, कंट्रोल रूम में मंडल के तमाम अधिकारियों, एंबुलेंस, दमकल विभाग व आरपीएफ और एनडीआरएफ के संपर्क नंबर होंगे। स्पेशल ड्यूटी ऑफिसर आला अधिकारियों से संपर्क में रहेंगे। वह हर पल की जानकारी फोटो के साथ अधिकारियों को व्हाट्सएप ग्रुप पर देंगे।

Friday, 8 October 2021

बीजेपी में किया दीदी का अपमान; अब ऐसे नेताओं को टीएमसी बुलाकर ममता कर रहीं अपना नुकसान'

बीजेपी में किया दीदी का अपमान; अब ऐसे नेताओं को टीएमसी बुलाकर ममता कर रहीं अपना नुकसान'

 

कोलकाता 
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस एक-एक कर अपने सभी साथियों की पार्टी में वापसी करा रही है। गुरुवार को राजरहाट से विधायक सब्यसाची दत्ता दो साल तक बीजेपी में रहने के बाद दोबारा टीएमसी में शामिल हो गए। हालांकि, नेताओं की घर वापसी को लेकर टीएमसी के कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है। 

टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने किसी का नाम लिए बगैर कहा, 'हाल के विधानसभा चुनावों में जिन लोगों ने ममता बनर्जी का अपमान किया, उन्हें टीएमसी में वापस लाने से हमारे कार्यकर्ता नाखुश हैं। यह स्वाभाविक है कि पार्टी के गंभीर कार्यकर्ताओं को उन लोगों की वापसी पसंद न आए जो कल तक किसी और पार्टी में थे और अब एक बार फिर से टीएमसी में हैं।'

सब्यसाची दत्ता ने गुरुवार को बंगाल सीएम ममता बनर्जी और दो अन्य- जाकिर हुसैन, अमीरुल इस्लाम के विधायक पद की शपथ के बाद टीएमसी जॉइन की। दत्ता बीजेपी के राज्य सचिवों में से एक थे। पार्टी में शामिल होने के बाद दत्ता ने कहा, 'मैंने एक भावुक निर्णय लिया और पार्टी सहयोगियों के साथ गलतफहमियों की वजह से बीजेपी चला गया। टीएमसी मुझे जो भी भूमिका देगी मैं उसे दिल से निभाऊंगा।'

  
इस बीच टीएमसी के बंगाल महासचिव कुणाल घोष ने भी तंज भरे अंदाज में कहा, 'जिन लोगों को एहसास हो गया कि टीएमसी के बाहर उनका कोई अस्तित्व नहीं और वे ममता बनर्जी की शरण के बिना नहीं जी सकते, वे पार्टी में वापसी कर रहे हैं।'बता दें कि दत्ता इस साल जून माह से अब तक बीजेपी छोड़ टीएमसी में वापसी करने वाले छठे नेता हैं। 

NCB ने नाइजीरियाई युवक समेत अब तक 17 लोगों को पकड़ा, ड्रग्स की 40 गोलियां बरामद

NCB ने नाइजीरियाई युवक समेत अब तक 17 लोगों को पकड़ा, ड्रग्स की 40 गोलियां बरामद

 

नई दिल्ली
मुंबई क्रूज ड्रग्स केस में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की कार्रवाई जारी है। एनसीबी ने अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया था। गुरुवार को एक नाइजीरियाई युवक को भी गिरफ्तार किया गया है। जिसके बाद अब तक पकड़े गये कुल लोगों की संख्या 17 हो गई है। रात के अंधेरे में इस नाइजीरियाई युवक को पकड़ा गया है। बताया जा रहा है कि इसके पास से प्रतिबंधित ड्रग्स  Ecstasy की 40 गोलियां मिली हैं। मुंबई तट के पास एक क्रूज जहाज से कथित तौर पर मादक पदार्थ जब्त होने से संबंधित मामले में यहां की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान और सात अन्य आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस दौरान न्यायाधीश ने एनसीबी की हिरासत अवधि बढ़ाए जाने की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि अस्पष्ट आधार पर हिरासत प्रदान नहीं की जा सकती।  अदालत ने कहा कि जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की जाएगी।

स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) ने आर्यन खान और अन्य आरोपियों की एनसीबी हिरासत अवधि बढ़ाए जाने का अनुरोध करते हुए दलील दी कि साजिश की कड़ियों का खुलासा करने के लिए आरोपियों का सामना इस मामले में गिरफ्तार अन्य व्यक्ति से कराए जाने की जरूरत है। हालांकि, अदालत ने इसे अनुमति नहीं दी। गोवा जा रहे क्रूज पर तीन अक्टूबर को की गई छापेमारी के दौरान आर्यन खान, मुनमुन धमेचा और अरबाज मर्जेंट को एनसीबी ने गिरफ्तार किया था जबकि बाकी पांच अन्य आरोपियों को अगले दिन गिरफ्तार किया गया था। बृहस्पतिवार को रिमांड अवधि समाप्त होने पर आरोपियों को अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट आर एम नेर्लिकर के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। एनसीबी आरोपियों को 11 अक्टूबर तक हिरासत में रखना चाहती थी। एजेंसी ने अदालत से कहा कि उसने आर्यन और मर्चेंट के बयानों के आधार पर अचित कुमार को गिरफ्तार किया है। एनसीबी ने कहा कि साजिश का पर्दाफाश करने के लिए आरोपियों का कुमार से सामना कराए जाने की जरूरत है।

सभी आरोपियों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि एनसीबी की आरोपियों की हिरासत अवधि बढ़ाने की याचिका का मकसद कुमार से आरोपियों का सामना कराना है। कुमार को बुधवार शाम को गिरफ्तार किया गया था। उसे बृहस्पतिवार को अदालत के समक्ष पेश किया गया जहां से कुमार को नौ अक्टूबर तक एनसीबी की हिरासत में भेज दिया गया। अदालत ने कुमार की गिरफ्तारी के समय को ध्यान में रखते हुए कहा कि जब आर्यन और कुमार एनसीबी की हिरासत में थे और उन्हें अदालत में पेश किए जाने तक कोई जांच नहीं की गई। अदालत ने कहा कि बचाव पक्ष के वकीलों की दलील है कि एजेंसी को अब तक की गई जांच का ब्यौरा देना चाहिए जोकि उसके द्वारा दायर रिमांड आवेदन में दिखाई नहीं पड़ती है। अदालत ने कहा कि बिना पुष्ट कारण के हिरासत प्रदान नहीं की जा सकती है।