उत्तम प्रदेश समाचार : मध्यप्रदेश

Breaking
Loading...
Menu

Saturday, 16 October 2021

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में "ज़ायका" का शुभारंभ

 



भोपाल

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल द्वारा संग्रहालय भ्रमण पर आने वाले दर्शकों की मांग पर भील जनजाति के  पारंपरिक भोजन कार्यक्रम जायका की शुरूआत की गयी है। इस भोजन को भोपाल शहर के भोजन प्रेमी लोगों ने काफी पसंद किया है। इस संबंध में निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने बताया कि पिछले दो दशकों में विश्व के तमाम बड़े वैज्ञानिकों ने अपने शोध से ये साबित भी किया है कि जनजातियों के प्राकृतिक आहार को यदि आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में लोग अपना लें, तो पोषक तत्वों की कमी से होने वाले अनेक रोगों की छुट्टी हो सकती है। मक्के की रोटी का सेवन करने से हमारे शरीर को फाइबर प्राप्त होता है, जो पाचन संबंधी समस्याओं से राहत पाने में मदद करता है। यह शरीर में कॉलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। साथ ही फाइबर युक्त आहार लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है।

संग्रहालय की केंटिन मे प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को दोपहर 1 बजे से 4 बजे के मध्य स्वाद प्रेमियों के लिए मध्यप्रदेश के भील जनजाति का पारंपरिक भोजन मक्का की रोटी, बैगन का भुर्ता, धनिया, लेहसुन की चटनी, गुड आदि पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर उपलब्ध है। जानकारी के लिए  मो. नं. 9479438303  पर संपर्क किया जा सकता है।

माशिम ने दसवीं व बारहवीं बोर्ड परीक्षा की तैयारियां शुरू की


भोपाल

 इस साल मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिम) ने दसवीं व बारहवीं बोर्ड परीक्षा की तैयारियां शुरू कर दी है। पिछले साल कोरोना काल के कारण परीक्षा नहीं हो पाई थी। इस साल माशिमं मार्च में परीक्षा कराने के प्रयास में है। इसके लिए परीक्षा केंद्रों की सूची भी जिले से मंगा ली गई है। इस बार हर जिले में 10 से 15 फीसद अधिक परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे, ताकि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षित शारीरिक दूरी का पालन हो सके।

इसके अलावा माशिमं ने सत्र 2021-22 से 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा के प्रश्नों के पैटर्न में बदलाव किया है। इस सत्र के प्रश्नपत्र में 40 फीसद अंकों के वस्तुनिष्ट प्रश्न पूछे जाएंगे। अभी तक माशिम की 10वीं व 12वीं की परीक्षा में 25 फीसद अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते थे। नए पैटर्न पर अभी हाल ही में नौवीं से बारहवीं की तिमाही परीक्षा भी ली गई, ताकि विद्यार्थी पहले से ही बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार हो जाएं।

इस बार तिमाही परीक्षा तीन के बदले ढाई घंटे की ली गई। इस कारण बोर्ड परीक्षा के समय में भी आधा घंटा कम होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, माशिमं के अधिकारी अभी इससे इन्कार कर रहे हैं। उनका कहना है कि अभी बोर्ड परीक्षा के समय को लेकर कोई निर्णय नहीं किया गया है। बता दें, कि अब 40 फीसद अंकों के प्रश्न सिर्फ वस्तुनिष्ट होंगे। इन सब बदलाव से विद्यार्थी आसानी से पास हो सकेंगे। माशिमं की परीक्षा में 33 फीसद अंक पर विद्यार्थियों को पास किया जाता है।

Friday, 15 October 2021

बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है दशहरा



विजय दशमी या विजयादशमी अथवा दशहरा आश्विन शुक्ल दशमी को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह भारत का राष्ट्रीय त्योहार है। रामलीला में जगह-जगह रावण वध का प्रदर्शन होता है। क्षत्रियों के यहां शस्त्रों की पूजा होती है। ब्रज के मंदिरों में इस दिन विशेष दर्शन होते हैं। इस दिन नीलकंठ का दर्शन बहुत शुभ माना जाता है। यह त्योहार क्षत्रियों का माना जाता है। इसमें अपराजिता देवी की पूजा होती है। यह पूजन भी सर्वसुख देने वाला है। दशहरा या विजया दशमी नवरात्रि के बाद दसवें दिन मनाया जाता है। इस दिन राम ने रावण का वध किया था। रावण राम की पत्नी सीता का अपहरण कर लंका ले गया था। भगवान राम युद्ध की देवी मां दुर्गा के भक्त थे, उन्होंने युद्ध के दौरान पहले नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा की और दसवें दिन दुष्ट रावण का वध किया। इसके बाद राम ने भाई लक्ष्मण, भक्त हनुमान और बंदरों की सेना के साथ एक बड़ा युद्ध लड़कर सीता को छुड़ाया। इसलिए विजयादशमी एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण दिन है। इस दिन रावण, उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद के पुतले खुली जगह में जलाए जाते हैं। कलाकार राम, सीता और लक्ष्मण के रूप धारण करते हैं और आग के तीर से इन पुतलों को मारते हैं जो पटाखों से भरे होते हैं। पुतले में आग लगते ही वह धू-धू कर जलने लगता है और इनमें लगे पटाखे फटने लगते हैं और जिससे इनका अंत हो जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है…

दशहरा उत्सव की उत्पत्ति

दशहरा उत्सव की उत्पत्ति के विषय में कई कल्पनाएं की गई हैं। भारत के कतिपय भागों में नए अन्नों की हवि देने, द्वार पर धान की हरी एवं अनपकी बालियों को टांगने तथा गेहूं आदि को कानों, मस्तक या पगड़ी पर रखने के कृत्य होते हैं। अतः कुछ लोगों का मत है कि यह कृषि का उत्सव है। कुछ लोगों के मत से यह रणयात्रा का द्योतक है क्योंकि दशहरा के समय वर्षा समाप्त हो जाती है, नदियों की बाढ़ थम जाती है, धान आदि कोष्ठागार में रखे जाने वाले हो जाते हैं।

संभवतः यह उत्सव इसी दूसरे मत से संबंधित है। भारत के अतिरिक्त अन्य देशों में भी राजाओं के युद्ध प्रयाण के लिए यही ऋतु निश्चित थी। शमी पूजा भी प्राचीन है। वैदिक यज्ञों के लिए शमी वृक्ष में उगे अश्वत्थ (पीपल) की दो टहनियों (अरणियों) से अग्नि उत्पन्न की जाती थी। अग्नि शक्ति एवं साहस की द्योतक है, शमी की लकड़ी के कुंदे अग्नि उत्पत्ति में सहायक होते हैं, जहां अग्नि एवं शमी की पवित्रता एवं उपयोगिता की ओर मंत्रसिक्त संकेत हैं। इस उत्सव का संबंध नवरात्र से भी है क्योंकि इसमें महिषासुर के विरोध में देवी के साहसपूर्ण कृत्यों का भी उल्लेख होता है और नवरात्र के उपरांत ही यह उत्सव होता है।

रामलीला

दशहरा उत्सव में रामलीला भी महत्त्वपूर्ण है। रामलीला में राम, सीता और लक्ष्मण के जीवन के वृत्तांत का वर्णन किया जाता है। रामलीला नाटक का मंचन देश के विभिन्न क्षेत्रों में होता है। यह देश में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। बंगाल और मध्य भारत के अलावा दशहरा पर्व देश के अन्य राज्यों में क्षेत्रीय विषमता के बावजूद एक समान उत्साह और शौक से मनाया जाता है। उत्तरी भारत में रामलीला के उत्सव दस दिनों तक चलते रहते हैं और आश्विन माह की दशमी को समाप्त होते हैं, जिस दिन रावण एवं उसके साथियों की आकृति जलाई जाती है। इसके अतिरिक्त इस अवसर पर और भी कई प्रकार के कृत्य होते हैं, यथा हथियारों की पूजा, दशहरा या विजयादशमी से संबंधित वृत्तियों के औजारों या यंत्रों की पूजा।

पौराणिक मान्यताएं

इस अवसर पर कहीं-कहीं भैंसे या बकरे की बलि दी जाती है। भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व देशी राज्यों में, यथा बड़ोदा, मैसूर आदि रियासतों में विजयादशमी के अवसर पर दरबार लगते थे और हौदों से युक्त हाथी दौड़ते तथा उछलकूद करते हुए घोड़ों की सवारियां राजधानी की सड़कों पर निकलती थीं और जुलूस निकाला जाता था। प्राचीन एवं मध्य काल में घोड़ों, हाथियों, सैनिकों एवं स्वयं का नीराजन उत्सव राजा लोग करते थे।

वनस्पति पूजन

विजयदशमी पर दो विशेष प्रकार की वनस्पतियों के पूजन का महत्त्व है। एक है शमी वृक्ष, जिसका पूजन रावण दहन के बाद करके इसकी पत्तियों को स्वर्ण पत्तियों के रूप में एक-दूसरे को ससम्मान प्रदान किया जाता है। इस परंपरा में विजय उल्लास पर्व की कामना के साथ समृद्धि की कामना करते हैं। दूसरा है अपराजिता। यह पौधा अपने नाम के अनुरूप ही है। यह विष्णु को प्रिय है और प्रत्येक परिस्थिति में सहायक बनकर विजय प्रदान करने वाला है। नीले रंग के पुष्प का यह पौधा भारत में सुलभता से उपलब्ध है। घरों में समृद्धि के लिए तुलसी की भांति इसकी नियमित सेवा की जाती है। मेला दशहरा पर्व को मनाने के लिए जगह-जगह बड़े मेलों का आयोजन किया जाता है। यहां लोग अपने परिवार, दोस्तों के साथ आते हैं और खुले आसमान के नीचे मेले का पूरा आनंद लेते हैं। मेले में तरह-तरह की वस्तुएं, चूडि़यों से लेकर खिलौने और कपड़े बेचे जाते हैं। इसके साथ ही मेले में व्यंजनों की भी भरमार रहती है।

Saturday, 9 October 2021

टीकमगढ़ में लोकायुक्त की कार्रवाई, एक लाख रुपए घूस लेते गिरफ्तार

टीकमगढ़ में लोकायुक्त की कार्रवाई, एक लाख रुपए घूस लेते गिरफ्तार

भोपाल
टीकमगढ़ एमपीईबी का कार्यपालन अभियंता अखिलेश प्रसाद त्रिवेदी को लोकायुक्त पुलिस सागर ने एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। त्रिवेदी ने 50 हजार रुपए नकद लिए और रिश्वत के बाकी के 50 हजार रुपए का चेक लिया। त्रिवेदी ने 6 महीने के भीतर फरियादी द्वारा रुपए देने पर चेक वापस करने का वादा किया गया था। टीकमगढ़ जिले के गांव रानीगंज के रहने वाले किशोर सिंह दांगी ने एसपी लोकायुक्त सागर रामेश्वर यादव को शिकायत की थी कि उसकी गांव में चक्की है, कोरोना के कारण वह बिल जमा नहीं कर सका। कुछ दिनों पहले एमपीईबी की फ्लार्इंग स्क्वॉड ने उसके यहां पर चार लाख रुपए की बिजली का बिल निकाल दिया। जिस पर उसने इतनी रकम जमा करने में असमर्थता जताई।

एमपीईबी के ईई से मिलने पर दांगी से कहा गया कि प्रकरण को दो लाख रुपए का कर देंगे, लेकिन बचे हुए दो लाख में से 1 लाख रुपए ईई को देना होंगे। जब दांगी ने एक लाख रुपए नहीं होने की बात की तो ईई की तरफ से कहा गया कि 50 हजार रुपए नकद दे और 50 हजार रुपए का चेक दें और 6 महीने के अंदर रुपए देने पर अपना चेक वापस ले जाएं। इस शिकायत की पुष्टि करने के बाद आज सुबह लोकायुक्त पुलिस टीकमगढ़ पहुंची। जहां पर त्रिवेदी के सुभाष कॉलोनी स्थित आवास पर जैसे ही दांगी ने उन्हें 50 हजार रुपए दिए और 50 हजार रुपए का चेक दिया, वैसे ही लोकायुक्त पुलिस की निरीक्षक मंजू सिंह और स्टॉफ ने उन्हें दबोच लिया।

मध्यप्रदेश में पिछले कुछ दिनों ने करप्शन के खिलाफ मुहिम तेजी से चलाई जा रही है। कुछ दिनों से रोज किसी ने किसी अधिकारी पर कार्रवाई की जानकारी आ रही है। गुरुवार को ही शिवपुरी में सहकारी समिति के सहायक प्रबंधक के घर ईओडब्ल्यू की रेड में पांच करोड़ से ज्यादा की संपत्ति मिली है। इससे पहले (ईओडब्ल्यू) ने देवास जिले में वन विभाग के रेंजर को एक सरपंच से 20,000 रुपये की रिश्वत लेते बुधवार को रंगे हाथों पकड़ा। ईओडब्ल्यू ने रेंजर की संपत्तियों की जांच शुरू करते हुए उसके घर से 2.24 लाख रुपये की नकदी भी जब्त की है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि योजनाओं में पैसे लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इसके चलते भी कार्रवाई में तेजी आई है।

यूपी: स्टाफ नर्स के 2400+ पदों पर भर्तियां, 20 अक्टूबर से शुरू होंगे आवेदन

यूपी: स्टाफ नर्स के 2400+ पदों पर भर्तियां, 20 अक्टूबर से शुरू होंगे आवेदन


नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय ग्राणीण स्वास्थ्य मिशन (UPNRHM) के तहत राज्य में स्टाफ नर्स के 2400+ पदों पर भर्ती के लिए योग्य इच्छुक अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह भर्ती कंट्रैक्ट बेस (संविदा) पर होगी। यूपी में स्टाफ नर्स की इस भर्ती से कुल 2445 रिक्त पदों पर योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। यूपीएनआरएचएम नर्स भर्ती 2021 के लिए, आवेदन प्रक्रिया, योग्यता, आवेदन शुल्क व आयु सीमा की विस्तृत जानकारी भर्ती नोटिफिकेशन में पाई जा सकेगी। इस भर्ती के सबंध में अभी शॉर्ट नोटिस जारी किया गया है। यूपी स्टाफ नर्स भर्ती 2021 के शॉर्ट नोटिस के अनुसार, स्टाफ नर्स के 2445 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 20 अक्टूबर 2021 से शुरू होगी और अभ्यर्थी 09 नवंबर 2021 को रात 11:59 तक आवेदन कर सकेंगे।  उम्मीद है कि स्टाफ नर्स भर्ती का विस्तृत विज्ञापन 20 अक्टूबर को ही जारी कर दिया जाएगा। अभ्यर्थियों को सलाह है कि नर्स भर्ती जुड़ अपडेट के लिए समय-समय पर livehindustan.com और  www.upnrhm.gov.in को विजिट करते रहें।

कृषि विभाग में मुख्यमंत्री कोविड-19 योजना में 22 सदस्यों को मिली अनुकम्पा नियुक्ति

   कृषि विभाग में मुख्यमंत्री कोविड-19 योजना में 22 सदस्यों को मिली अनुकम्पा नियुक्ति


भोपाल

किसान-कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा 22 परिवारों के पात्र सदस्यों को गुरुवार 7 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर जन-प्रतिनिधियों द्वारा नियुक्ति-पत्र सौंपे गये। उक्त नियुक्तियाँ मुख्यमंत्री कोविड-19 अनुकम्पा नियुक्ति योजना अंतर्गत की गई हैं।

कलेक्टर कार्यालय इंदौर, राजगढ़, उज्जैन, रीवा, सिवनी, झाबुआ, शिवपुरी, अशोकनगर, रतलाम इत्यादि जिला मुख्यालयों पर जन-प्रतिनिधियों द्वारा शासन के नियमों एवं प्रावधानों के अनुसार अनुकम्पा नियुक्ति-पत्र प्रदान किये। सागर संभाग में 5, जबलपुर में 4, उज्जैन में 3, भोपाल, इंदौर एवं ग्वालियर में 2-2 और शहडोल संभाग में एक अभ्यर्थी को अनुकम्पा नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया है। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार कोविड संकट काल में कर्त्तव्य निर्वहन के दौरान 22 विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों के आकस्मिक निधन से उनके एक-एक परिजन को अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की गई है।

कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार सभी 22 अभ्यर्थियों को सहायक ग्रेड-3 के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति दी गई है। इनमें सामान्य वर्ग के 11, अन्य पिछड़ा वर्ग के 7 और अनुसूचित-जाति एवं जनजाति वर्ग के 2-2 अभ्यर्थियों को अनुकम्पा नियुक्ति दी गई। नौ आवेदकों को नियमित पदों के विरुद्ध, जबकि 13 आवेदकों को वित्त एवं सामान्य प्रशासन विभाग की अनुमति अनुसार सांख्येत्तर पदों के विरुद्ध अनुकम्पा नियुक्ति दी गई है।

Wednesday, 6 October 2021

नवदुर्गा उत्सव में गरबा भी होगा और डीजे भी बजेगा, लेकिन दस बजे तक

 नवदुर्गा उत्सव में गरबा भी होगा और डीजे भी बजेगा, लेकिन दस बजे तक


Shivraj Cabinet Decisions: नवदुर्गा उत्सव में गरबा भी होगा और डीजे भी बजेगा, लेकिन दस बजे तक

Tuesday, 5 October 2021

19 जिलों के 3000 ग्रामों में होगा भू-अधिकार अभिलेख का वितरण:राजस्व मंत्री राजपूत

19 जिलों के 3000 ग्रामों में होगा भू-अधिकार अभिलेख का वितरण:राजस्व मंत्री राजपूत

 

भोपाल

राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश के 19 जिलों के 3000 ग्रामों में स्वामित्व योजना के तहत एक लाख 71 हजार हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख का वितरण किया जाएगा। बताया कि 6 अक्टूबर को जन-कल्याण और सुराज अभियान के तहत हरदा में राज्य स्तरीय कार्यक्रम होगा भौतिक रूप से भूमि अधिकार पत्रों का वितरण होगा। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल होंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे।

अधिकार-पत्रों का होगा भौतिक वितरण

मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 24 अप्रैल 21 को प्रदेश के 1399 ग्रामों में अधिकार अभिलेख का वितरण कोरोना महामारी के कारण इलेक्ट्रॉनिक रूप में किया गया था, जिसका 6 अक्टूबर को भौतिक रूप से वितरण किया जाएगा। प्रदेश में इस योजना का क्रियान्वयन तीन चरणों में 10-10 जिलों को शामिल कर क्रमबद्ध रूप से प्रारंभ किया गया हैं।

24 जिलों में 24 ड्रोन बना रहे नक्शे

राजपूत ने बताया कि स्वामित्व योजना में सर्वे ऑफ इंडिया की सहायता से ग्रामों में बसाहट क्षेत्र पर ड्रोन के माध्यम से नक्शें का निर्माण तथा डोर-टॅ-डोर सर्वे कर अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया जा रहा है। अभी तक प्रदेश के 42 जिलों में सर्वेक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।24 ड्रोन 24 जिलों में कार्य रह रहे हैं इनमें से 6500 ग्रामों में ड्रोन कार्य पूर्ण कर चुके हैं।

नियमों का किया सरलीकरण

मंत्री राजपूत ने बताया कि हितग्राहियों को योजना का अधिक से अधिक लाभ प्रदान करने के लिए सर्वे के नियमों का आज की आवश्यकता के अनुसार सरलीकरण किया गया है। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों को विधिक दस्तावेज का दर्जा, सर्वे को समय सीमा में पूर्ण करना, अभिलेखों को पारदर्शिता के साथ तैयार करना, सर्वे प्रक्रिया को ऑन लाइन करना और एप्प के माध्यम सर्वेक्षक मौके पर धारक का नाम जोड़ सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली और अन्य राज्यों ने इसे अपने यहाँ लागू करने के लिए प्रक्रिया का अवलोकन भी किया है।

बाढ़ राहत के रूप में 163.28 करोड़ की राशि वितरित

बाढ़ राहत के रूप में 163.28 करोड़ की राशि वितरित

 

भोपाल

ग्वालियर, चंबल एवं मुरैना संभाग में विगत अगस्त माह में अतिवृष्टि से आई बाढ़ के कारण पीड़ितों को उनकी क्षतिपूर्ति के रूप में 163.28 करोड़ की राहत राशि वितरित की गई। इसमें अकेले श्योपुर के प्रभावित 6 गाँवों में 4 करोड़ 34 लाख 19 हजार रुपये की राशि राहत प्रभावितों के खाते में अंतरित की गई।

श्योपुर के ग्राम बासोद, लोहाड़, धर्मपुरा, बिदाखेड़ली, विचगावड़ी और धानोद ग्राम में गंभीर प्रकार की क्षतिपूर्ति के लिये 71 लाख 11 हजार 400 रुपये, सामान्य क्षतिपूर्ति के रूप में एक करोड़ 23 लाख 30 हजार रुपये, आंशिक क्षतिपूर्ति के रूप में 74 लाख 90 हजार 800 रुपये एवं पूर्ण क्षति वाले प्रकरणों में 2 करोड़ 20 लाख 76 हजार 500 रुपये पात्र लोगों को वितरित किये गये।

राहत राशि के रूप में बासोदा ग्राम में 709, लोहाड़ ग्राम में 763, धर्मपुरा गाँव में 247, बिदाखेड़ली में 247, विचगावड़ी में 540 और धानौद ग्राम में 163 प्रभावितों को क्षतिपूर्ति राशि वितरित की गई। श्योपुर जिले के इन 6 गाँव के 2669 हितग्राहियों को 4 करोड़ 34 लाख 19 हजार रुपये की राशि वितरित जा चुकी है।

कड़कनाथ के लिये झाबुआ में स्थापित होगी 30 हजार क्षमता की हेचरी मशीन

कड़कनाथ के लिये झाबुआ में स्थापित होगी 30 हजार क्षमता की हेचरी मशीन

 


भोपाल

अपर मुख्य सचिव जे.एन. कंसोटिया ने झाबुआ में पूर्णप्राय: नव-निर्मित हेचरी भवन का निरीक्षण कर 15 अक्टूबर तक 30 हजार क्षमता की नई हेचरी मशीन लगाने के निर्देश दिये हैं। कंसोटिया ने कहा कि वर्तमान हेचरी मशीन पुरानी होने से पिछले एक वर्ष में चूजा़ उत्पादन काफी कम हुआ है।

दाना-पानी-बर्तन क्रय अनुमति एक हजार से बढ़कर 10 हजार रूपये

कंसोटिया ने लेयर हाउस में कड़कनाथ मुर्गा पालन का भी अवलोकन किया। प्रबंधक ने बताया कि प्रक्षेत्र पर पक्षियों के दाना एवं पानी के बर्तनों की खरीदी के लिये एक हजार की अनुमति अपर्याप्त है। कंसोटिया ने सामग्री क्रय अनुमति 10 हजार रूपये करने के निर्देश संचालक मेहिया को दिये।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत के स्वाभिमान, सम्मान और अभिमान की परिचायक - मंत्री डॉ.यादव

राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत के स्वाभिमान, सम्मान और अभिमान की परिचायक - मंत्री डॉ.यादव

 

भोपाल

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव सोमवार को उज्जैन के कालिदास अकादमी के पं.सूर्यनारायण संकुल सभागृह में प्रदेश में लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की संभाग स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला में शामिल हुए। मंत्री डॉ.यादव ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत के स्वाभिमान, सम्मान और अभिमान की परिचायक है। हम शिक्षा को देश के अनुकूल बनाना चाह रहे हैं। शिक्षा प्राप्त करने के बाद व्यक्ति योग्य नागरिक बने तथा उसके सामने आजीविका का संकट खड़ा न हो, इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है। मंत्री डॉ.यादव ने कहा कि आजादी के बाद दो बार हमारे देश में शिक्षा नीति लागू की गई, किन्तु दोनों ही बार इसके विपरीत परिणाम दिखाई दिये। अत: सन 2020 में देश में गहन विचार-विमर्श करके हमारी ऋषि परम्परा को प्रकट करने वाली शिक्षा नीति लागू की गई है। मंत्री डॉ.यादव ने कहा कि सन 1835 में अंग्रेज सरकार के दौरान लॉर्ड मैकाले के नेतृत्व में हमारे देश में स्कूलों का पाठ्यक्रम तैयार किया गया था और हमारी प्राचीन शिक्षा नीति को बदलने का प्रयास किया गया, लेकिन वर्तमान में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पुन: हमारी संस्कृति से जुड़ी शिक्षा नीति लाने का प्रयास किया गया है। कई सुझाव और लम्बे चिन्तन के बाद नई शिक्षा नीति लागू की गई है। मध्यप्रदेश का मॉडल पूरे देश के लिये प्रेरणा बनेगा।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ.सत्यनारायण जटिया ने कहा कि शिक्षक जब शिक्षा देता है तो उनका भी प्रशिक्षण होता है। क्या, क्यों और कैसे का समाधान है शिक्षा में। वर्तमान में इनोवेटिव शिक्षा को लागू करने की आवश्यकता थी। इसी को ध्यान में रखते हुए नई शिक्षा नीति लागू की गई। सामाजिक न्याय के लिये शिक्षा बहुत जरूरी है। भारत युवाओं का देश है। बहुआयामी प्रतिभाओं का विकास करना बेहद जरूरी है। नई शिक्षा नीति निश्चित रूप से नये भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी।

सांसद अनिल फिरोजिया ने कहा कि मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति की पहली कार्यशाला उज्जैन में हो रही है। यह नीति अत्यन्त सार्थक सिद्ध होगी। हमारे देश की प्राचीन शिक्षा पद्धति पूरे विश्व में प्रख्यात है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में नई शिक्षा नीति लागू की गई है। निश्चित रूप से नई शिक्षा नीति एक नये भारत का निर्माण करेगी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई इबारत लिखी जायेगी।

प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा अनुपम राजन कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति जब 2020 में लागू की गई, तब कोविड चरम पर था। मध्यप्रदेश उन अग्रणीराज्यों में है, जिन्होंने शिक्षा नीति अपने यहां लागू की है। विगत 26 अगस्त को मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति को हमने अंगीकार किया। प्रदेश के प्रत्येक महाविद्यालय में हैल्पडेस्क का गठन किया गया है, जो विद्यार्थियों को नई शिक्षा नीति से अवगत करा रहे हैं तथा उनकी शंकाओं का समाधान कर रहे हैं। पूरे सिलेबस को रि-डिजाईन किया गया है। विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख कोर्सेस भी पढ़ाये जायेंगे। समय-समय पर दूसरे संभागों और जिलों में भी इस तरह की कार्यशाला आयोजित की जायेगी।

Monday, 4 October 2021

पचमढ़ी में मैराथन का तृतीय संस्करण आयोजित, प्रतिभागियों को किया पुरस्कृत

पचमढ़ी में मैराथन का तृतीय संस्करण आयोजित, प्रतिभागियों को किया पुरस्कृत

 


भोपाल
प्रदेश के खूबसूरत हिल स्टेशन पचमढ़ी के नैसर्गिक सौन्दर्य और प्राकृतिक वातावरण से पर्यटकों को रू-ब-रू कराने तथा पर्यटन के लिए अधिक से अधिक सैलानियों को आकर्षित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा "पचमढ़ी मैराथन'' का तृतीय संस्करण आयोजित किया गया। राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक एस. विश्वनाथन ने कहा कि मैराथन के आयोजन से प्रदेश में स्वास्थ्य पर्यटन (वेलनेस टूरिज्म) एवं एक्टिव हॉलीडेज कांसेप्ट को बढ़ावा देने का एक सार्थक प्रयास किया जा रहा है। पचमढ़ी प्रदेश का नंबर वन टूरिज्म स्पॉट है। यहाँ साल भर सभी मौसम चाहे सर्दी हो या बरसात, देश के कोने-कोने से सैलानी आते हैं और प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ उठाते हैं। विश्वनाथन ने कहा कि पचमढ़ी में प्रोफेशनल मैराथन आयोजित किए जाने की कार्य-योजना तैयार की जा रही है।  उन्होंने पचमढ़ी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।  

तीन श्रेणियों में आयोजित हुई मैराथन, विजेताओं को फ्री स्टे वाउचर

मैराथन को तीन श्रेणियों 5 कि.मी., 10 कि.मी. और 21 कि.मी. में आयोजित किया गया। इन श्रेणियों को फैमिली फन रन,‘एंड्योरेंस रन और धूपगढ़ पहाड़ी रन नाम दिया गया। टूरिज्म बोर्ड ने मैराथन में भाग लेने वाले सभी धावकों को टी-शर्ट, आरएफआईडी टाइमिंग चिप, रूट सपोर्ट, फिनिशर्स मेडल और ई-सर्टिफिकेट प्रदान किए। साथ ही प्रतियोगिता के शीर्ष तीन धावकों को अतिथियों ने ट्रॉफी और दो रात्रि और तीन दिवस के फ्री स्टे वाउचर प्रदान किये गए।

मैराथन के पहले संस्करण की अपार सफलता से प्रतिवर्ष मैराथन का सिलसिला शुरू

मैराथन का पहला संस्करण वर्ष 2018 में 22 जुलाई को आयोजित किया गया था, जिसमें लगभग 800 पर्यटकों ने भाग लिया। प्रथम संस्करण की अपार सफलता के बाद इस मैराथन को मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा एक वार्षिक कार्यक्रम के रूप में प्रतिवर्ष आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इसका दूसरा संस्करण वर्ष 2019 में 21 जुलाई को आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 800 -1000 पर्यटकों ने हिस्सा लिया। कोविड-19 महामारी के दृष्टिगत वर्ष 2020 में इस मैराथन आयोजन नहीं हो सका था।

कोविड प्रोटोकॉल के तहत आयोजित हुई मैराथन

मैराथन में कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए समस्त बचाव और सुरक्षा निर्देशों का पालन कर सीमित प्रतिभागियों के साथ आयोजित की गयी। भाग लेने वाले सभी पर्यटकों को पूर्ण रूप से कोविड वैक्सीनेटेड  होना और कोविड टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य था।

इस अवसर पर कमांडेंट एईएस सेंटर पचमढ़ी ब्रिगेडियर गिरीश गर्ग, कलेक्टर होशंगाबाद नीरज कुमार सिंह, फील्ड डायरेक्टर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व एल. कृष्णमूर्ति सहित पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

Saturday, 2 October 2021

बाइक राइडर अभिमन्यु सिंह ने शुरू की भारत भ्रमण यात्रा, पूरे भारत में 5100 पेड़ लगायेंगे




इसे जुनून नहीं तो और क्या कहेंगे जहाँ कोरोना के चलते लोग घर से बाहर निकलने से डरते है वहीँ एक नौजवान जिसे न गर्मी की चिंता है न बारिश के मौसम की, उसके सिर तो बस यही जुनून सवार है कि वह मोटर साइकिल से पूरे भारत का भ्रमण कर पर्यावरण बचाव का सन्देश दे | हम बात कर रहे हैं भोपाल के बाइक राइडर अभिमन्यु सिंह की जो भारत भ्रमण कर पौधारोपण की शुरुआत कर रहे है | इसी क्रम में सीएम हाउस में एक पौधा लगाकर अपने सफ़र शुरुआत की और अगले 100 दिन तक पूरे भारत में 51 सौ पौधा रोपण करेंगे |उत्तम प्रदेश के संपादक श्री अतुल दुबे जी को उन्होंने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से सम्पूर्ण विश्व जूझ रहा है जिससे बचने के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने होंगे | इसी मुहीम को पूरे देश तक फैलाना चाहते है |

भगवान महाकाल के दर्शन कर गजराज से लिया आशीर्वाद

भगवान महाकाल के दर्शन कर गजराज से लिया आशीर्वाद

 


भोपाल

किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री कमल पटेल ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन किये। उन्होंने बाबा महाकाल से प्रदेश की सुख-समृद्धि और किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की कामना की। दर्शन के बाद मंदिर क्षेत्र में गजराज ने मंत्री पटेल को अपन आशीर्वाद दिया।

Friday, 1 October 2021

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन - शहरी और अटल मिशन के दूसरे चरण की शुरुआत की




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘स्वच्छ भारत मिशन-शहरी’ और ‘कायाकल्प एवं शहरी सुधार के लिए अटल मिशन’ के दूसरे चरण की शुक्रवार को शुरुआत की।प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, प्रधानमंत्री की दृष्टि के अनुरूप स्वच्छ भारत मिशन 2.0 और ‘अमरुत 2.0’ को सभी शहरों को कचरा मुक्त करने और जल संरक्षण के लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए तैयार किया गया है। यहां आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने प्रमुख मिशन की शुरुआत की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि स्वच्छ भारत मिशन और अटल मिशन भारत में तेजी से शहरीकरण की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ने का संकेत देने के साथ-साथ सतत विकास लक्ष्य 2030 की उपलब्धि में योगदान करने में भी मददगार होंगे। स्वच्छ भारत मिशन सभी शहरों को 'कचरा मुक्त' बनाने और अटल मिशन के अंतर्गत आने वाले शहरों के अलावा अन्य सभी शहरों में धूसर और काले पानी के प्रबंधन को सुनिश्चित करने, सभी शहरी स्थानीय निकायों को खुले में शौच से मुक्त बनाने की परिकल्पना करता है, जिससे शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित स्वच्छता के लक्ष्‍य को पूरा किया जा सके।प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, अटल मिशन के दूसरे चरण का लक्ष्य लगभग 2.64 करोड़ सीवर कनेक्शन प्रदान करके लगभग 2.68 करोड़ नल कनेक्शन और 500 अमृत शहरों में सीवरेज और सेप्टेज का शत-प्रतिशत कवरेज करते हुए लगभग 4,700 शहरी स्थानीय निकायों में सभी घरों में पेयजल की आपूर्ति का शत-प्रतिशत कवरेज प्रदान करना है। मुताबिक इससे शहरी क्षेत्रों में 10.5 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ होगा।इस अवसर पर आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी और राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों के शहरी विकास मंत्री भी मौजूद थे।

गन्ने के खेत में मिली 2 साल की बच्ची, पहचान अब भी रहस्य ही बनी

गन्ने के खेत में मिली 2 साल की बच्ची, पहचान अब भी रहस्य ही बनी

 

 नई दिल्ली  
कर्नाटक के बेलगावी में पिछले हफ्ते मिली दो साल की बच्ची की पहचान अब भी रहस्य ही बनी हुई है, हालांकि पुलिस ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया है। बता दें कि कुछ किसानों ने उसे कपड़े के टुकड़े में लपेटा और गन्ने के खेत में छोड़ दिया। बच्ची के शरीर पर जलाने के निशान पाए गए हैं। शुरुआती जांच में बताया गया है कि जलाने का यह पैटर्न काले-जादू की तरफ इशारा करता है। इसके अलावा अभी तक यौन उत्पीड़न की बात सामने नहीं आई है। 


उत्तरी कर्नाटक के बेलगावी के हल्याल गांव में 24 सितंबर को मिली बच्ची के जलने के कई निशान थे, खासकर सिगरेट के बट के निशान, यहां तक ​​कि उसके निजी अंगों पर भी। हालांकि प्रारंभिक जांच में यौन उत्पीड़न की बात सामने नहीं आई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार जलने के निशान का पैटर्न काले जादू की ओर इशारा करता है। मेडिकल जांच में उसके घावों पर पाए गए रसायनों के निशान भी मिले हैं, जो आमतौर पर काले जादू में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री की उपस्थिति की पुष्टि करते हैं।

लड़की का अब बेलगावी जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसे होश आ गया है, लेकिन छोटी होने के कारण वह मामले से जुड़ी कोई जानकारी दे पाने में असमर्थ है। पुलिस ने बच्ची की तस्वीर उपलब्ध कराई है, जिसे उसकी पहचान के लिए कर्नाटक और सीमावर्ती राज्यों जैसे महाराष्ट्र और तेलंगाना में व्यापक रूप से साझा किया जाएगा।

आम आदमी की थाली को पौष्टिक बनाएगा हरा सोयाबीन - कृषि मंत्री पटेल

आम आदमी की थाली को पौष्टिक बनाएगा हरा सोयाबीन - कृषि मंत्री पटेल

 

भोपाल

किसान-कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री कमल पटेल ने कहा है कि दलहन और तिलहन के रूप में इस्तेमाल हो रही सोयाबीन की अब सब्जी भी बन सकेगी। कृषि अनुसंधान केन्द्र इंदौर के वैज्ञानिकों ने हरी फली वाली सोयाबीन की किस्म को विकसित किया है। इससे आम आदमी की थाली और पौष्टिक होगी। कृषि मंत्री पटेल ने बालाघाट के चावल चिन्नौर किस्म को जीआई टैग मिलने पर प्रदेश के किसानों की ओर से प्रधानमंत्री और केन्द्रीय कृषि मंत्री का आभार ज्ञापित किया है।

कृषि मंत्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में प्रचलित फसलों की 35 नई आधुनिक किस्में राष्ट्र को समर्पित की हैं। ‌खेती को लाभ का धंधा बनाने का संकल्प पूरा करने में देश के साथ मध्यप्रदेश के कृषि वैज्ञानिक महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। यह फसलें किसानों को आत्म-निर्भर बनाने में सफल होंगी। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई फसलों की यह नई किस्में छोटे और सीमांत किसानों के लिए बेहद फायदेमंद होंगी। कृषि मंत्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों की आय दोगुना करने का संकल्प पूरा करने में जुटे हैं।

मंत्री पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश के कृषि वैज्ञानिक और अनुसंधान केन्द्रों का किसानों की आय को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जिन नई फसलों को राष्ट्र को समर्पित किया है, उनमें हरी फली वाली सोयाबीन देश में पहली बार विकसित हुई है। इसे अब सब्जी के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

किसान और वैज्ञानिक देश को बनायेंगे आत्म-निर्भर

मंत्री पटेल ने कहा कि किसानों और वैज्ञानिकों का गठजोड़ देश को आत्म-निर्भर बनाएगा। उन्होंने कहा कि प्रमुख फसलों जैसे अरहर, चना, बाजरा आदि की जो नई किस्में विकसित की गई हैं, वह पौष्टिकता से भरपूर हैं और उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता है, जिससे फसलों पर कीट-पतंगे लगने का डर नहीं है, छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह काफी सुरक्षित और फायदेमंद साबित होगी। देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जैव ईंधन तैयार करने के लिए ज्वार की नवीन किस्म विकसित की गई है जो किसानों के लिए वरदान होगी।

जी.आई. टैग के लिये प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री का किया आभार व्यक्त

किसान-कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री कमल पटेल ने मध्यप्रदेश के चावल को जी.आई. टैग मिलने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय कृषि मंत्री का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि अब बालाघाट के सुगंधित चावल की महक से पूरा भारत महकेगा। पटेल ने कहा कि बालाघाट की चिन्नौर किस्म को जी.आई. टैग मिलने से क्षेत्र के किसान उत्साहित हैं। जी.आई. टैग किसानों के लिये प्रोत्साहन और प्रेरणा का मार्ग प्रशस्त करेगा।

सी.एल.सी. अतिरिक्त चरण की प्रवेश प्रक्रिया 10 अक्टूबर तक संचालित होगी

सी.एल.सी. अतिरिक्त चरण की प्रवेश प्रक्रिया 10 अक्टूबर तक संचालित होगी

 


भोपाल

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मध्यप्रदेश के शासकीय/अनुदान प्राप्त अशासकीय/निजी अशासकीय महाविद्यालयों के स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं के लिए प्रवेश नियम, मार्गदर्शी सिद्धांत, अकादमिक कैलेण्डर एवं ऑनलाइन प्रवेश समय-सारणी जारी की गई है।

ऑनलाइन ई-प्रवेश प्रक्रिया 2021-22 के तहत सी.एल.सी. अतिरिक्त चरण की प्रवेश प्रक्रिया एक से 10 अक्टूबर, 2021 तक संचालित रहेंगी। नवीन आवेदकों के लिये एक से 8 अक्टूबर, 2021 तक ऑनलाइन पंजीयन एवं सत्यापन की सुविधा पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। सी.एल.सी. अतिरिक्त चरण के अंतर्गत ऑनलाइन पंजीकृत एवं सत्यापित आवेदक महाविद्यालय में स्वयं उपस्थित होकर निर्धारित तिथियों में रिक्त सीटों के लिये प्रात: 10 से 12 बजे तक आवेदन जमा कर सकेंगे। आवेदन के साथ कोई भी दस्तावेज संलग्न नहीं होगा।

विद्यार्थियों को सी.एल.सी. अतिरिक्त चरण के लिये आवेदन का प्रारूप एम.पी. ऑनलाइन के epravesh.mponling.gov.in पोर्टल पर उपलब्ध है। प्रत्येक महाविद्यालय आवेदन-पत्र का प्रारूप आवेदकों को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे। महाविद्यालय प्रतिदिन अपरान्ह एक बजे मेरिट लिस्ट तैयार कर नोटिस-बोर्ड पर चस्पा करेंगे और ऑनलाइन शुल्क भुगतान के लिये लिंक इनिशिएट करेंगे। प्रवेश शुल्क का ऑनलाइन भुगतान अपरान्ह एक बजे से दूसरे दिन प्रात: 11 बजे तक रहेगा। गाँधी जयंती 2 अक्टूबर को छोड़कर शेष अवकाश दिवसों में प्रवेश प्रक्रिया संचालित रहेगी।

प्रदेश में कक्षा पहली से पांचवी तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम एक अक्टूबर से

प्रदेश में कक्षा पहली से पांचवी तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम एक अक्टूबर से


भोपाल

प्रदेश में कक्षा पहली से पांचवी तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए "बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (Foundation Literacy & Numeracy)" विषय ऑनलाइन कोर्स श्रृंखला एक अक्टूबर से शुरू की गई है। संचालक राज्य शिक्षा केंद्र धनराजू एस ने बताया कि शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशन में एनसीईआरटी ने शिक्षकों के लिए 12 डिजिटल प्रशिक्षण कोर्स तैयार किए हैं। यह सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत सरकार के दीक्षा एप पर उपलब्ध कराए गए हैं। संबंधित कक्षाओं का अध्यापन कराने वाले शिक्षक अपनी सुविधानुसार समय पर अपने मोबाइल के माध्यम से ही इन कोर्स को पूर्ण कर सकेंगे। कोर्स पूर्ण करने पर शिक्षकों को इस प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र भी प्राप्त होगा।

धनराजू ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, कक्षा तीसरी तक के सभी बच्चों में 'बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान' को वर्ष 2026-27 तक सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। बच्चों के प्रारंभिक वर्ष उनके जीवन में वृद्धि और विकास के सबसे महत्वपूर्ण वर्ष होते हैं। यह वह समय होता है जब उनके समग्र विकास और सीखने की नींव रखी जाती है। जो बच्चे गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करते हैं वे सामाजिक, शैक्षिक और बौद्धिक क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। प्रारंभिक वर्षों में मजबूत नींव तैयार करने का बच्चों के विकास पर स्थाई प्रभाव पड़ता है। इस दृष्टि से कक्षा पहली से पाँचवी तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले प्राथमिक कक्षाओं के शिक्षकों के लिए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में कक्षा एक से 5 का अध्यापन कराने वाले सभी एक लाख  सत्ततर हज़ार छः सौ पचपन शिक्षकों से इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पूर्ण करने का आग्रह भी किया है।

Thursday, 30 September 2021

जीएसपी हमारी एसेट है, बने दूसरों के लिये मॉडल

जीएसपी हमारी एसेट है, बने दूसरों के लिये मॉडल


भोपाल

तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ने कहा है कि ग्लोबल स्किल पार्क हमारी एसेट है। इसके निर्माण में कोई भी कमी नहीं आनी चाहिये, 645 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा जीएसपी अंतर्राष्ट्रीय प्रोजेक्ट है और यह दूसरों के लिये एक मॉडल बनकर उभरना चाहिये। मंत्री श्रीमती सिंधिया बुधवार को भोपाल के नरेला संकरी स्थित निर्माणाधीन ग्लोबल स्किल पार्क के कार्य प्रगति की समीक्षा कर रही थी।

कौशल विकास मंत्री श्रीमती सिंधिया ने कहा कि जीएसपी मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का ड्रीम प्रोजेक्ट है, इसे सबसे बेहतरीन होना ही है। उन्होंने कहा कि जीएसपी परिसर में बॉयो डॉयवर्सिटी पार्क निर्मित करें। यहाँ युवाओं को ऐसा माहौल मिलना चाहिये, जिससे उन्हें मानसिक शांति मिले। श्रीमती सिंधिया ने कार्य की प्रगति की वस्तु-स्थिति को रिकॉर्ड करने के निर्देश दिये। इससे हम अपने कार्यों की प्रगति में गति ला सकेंगे। उन्होंने कहा कि परिसर में लैण्डस्केप तैयार करवाये। इसके लिये टेंडर प्रक्रिया अपनायें। साइट पर नोटिस बोर्ड लगायें और उसमें समय-समय पर किये गये और प्रगतिरत कार्यों की जानकारी चस्पा करें। इससे आम जनता को भी ग्लोबल स्किल पार्क के निर्माण प्रगति की जानकारी होगी। श्रीमती सिंधिया ने परिसर के पेड़ों को क्षति न पहुँचाते हुए निर्माण करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि अगर बिल्डिंग संरचना में डिजाइन को बदलना पड़े तो बदलें, पेड़ों को रिलोकेट करें।

इस अवसर पर संचालक कौशल विकास श्री जितेन्द्र राजे, प्रोजेक्ट डायरेक्टर जीएसपी श्री हरजिंदर सिंह एवं टाटा कंसल्टेंसी, मोन्टे कारलो और श्रीजी इन्फ्रॉस्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारी मौजूद थे।