उत्तम प्रदेश समाचार : मध्यप्रदेश

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Saturday, 16 October 2021

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में "ज़ायका" का शुभारंभ

 



भोपाल

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल द्वारा संग्रहालय भ्रमण पर आने वाले दर्शकों की मांग पर भील जनजाति के  पारंपरिक भोजन कार्यक्रम जायका की शुरूआत की गयी है। इस भोजन को भोपाल शहर के भोजन प्रेमी लोगों ने काफी पसंद किया है। इस संबंध में निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने बताया कि पिछले दो दशकों में विश्व के तमाम बड़े वैज्ञानिकों ने अपने शोध से ये साबित भी किया है कि जनजातियों के प्राकृतिक आहार को यदि आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में लोग अपना लें, तो पोषक तत्वों की कमी से होने वाले अनेक रोगों की छुट्टी हो सकती है। मक्के की रोटी का सेवन करने से हमारे शरीर को फाइबर प्राप्त होता है, जो पाचन संबंधी समस्याओं से राहत पाने में मदद करता है। यह शरीर में कॉलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। साथ ही फाइबर युक्त आहार लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है।

संग्रहालय की केंटिन मे प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को दोपहर 1 बजे से 4 बजे के मध्य स्वाद प्रेमियों के लिए मध्यप्रदेश के भील जनजाति का पारंपरिक भोजन मक्का की रोटी, बैगन का भुर्ता, धनिया, लेहसुन की चटनी, गुड आदि पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर उपलब्ध है। जानकारी के लिए  मो. नं. 9479438303  पर संपर्क किया जा सकता है।

माशिम ने दसवीं व बारहवीं बोर्ड परीक्षा की तैयारियां शुरू की


भोपाल

 इस साल मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिम) ने दसवीं व बारहवीं बोर्ड परीक्षा की तैयारियां शुरू कर दी है। पिछले साल कोरोना काल के कारण परीक्षा नहीं हो पाई थी। इस साल माशिमं मार्च में परीक्षा कराने के प्रयास में है। इसके लिए परीक्षा केंद्रों की सूची भी जिले से मंगा ली गई है। इस बार हर जिले में 10 से 15 फीसद अधिक परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे, ताकि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षित शारीरिक दूरी का पालन हो सके।

इसके अलावा माशिमं ने सत्र 2021-22 से 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा के प्रश्नों के पैटर्न में बदलाव किया है। इस सत्र के प्रश्नपत्र में 40 फीसद अंकों के वस्तुनिष्ट प्रश्न पूछे जाएंगे। अभी तक माशिम की 10वीं व 12वीं की परीक्षा में 25 फीसद अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते थे। नए पैटर्न पर अभी हाल ही में नौवीं से बारहवीं की तिमाही परीक्षा भी ली गई, ताकि विद्यार्थी पहले से ही बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार हो जाएं।

इस बार तिमाही परीक्षा तीन के बदले ढाई घंटे की ली गई। इस कारण बोर्ड परीक्षा के समय में भी आधा घंटा कम होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, माशिमं के अधिकारी अभी इससे इन्कार कर रहे हैं। उनका कहना है कि अभी बोर्ड परीक्षा के समय को लेकर कोई निर्णय नहीं किया गया है। बता दें, कि अब 40 फीसद अंकों के प्रश्न सिर्फ वस्तुनिष्ट होंगे। इन सब बदलाव से विद्यार्थी आसानी से पास हो सकेंगे। माशिमं की परीक्षा में 33 फीसद अंक पर विद्यार्थियों को पास किया जाता है।

Friday, 15 October 2021

बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है दशहरा



विजय दशमी या विजयादशमी अथवा दशहरा आश्विन शुक्ल दशमी को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह भारत का राष्ट्रीय त्योहार है। रामलीला में जगह-जगह रावण वध का प्रदर्शन होता है। क्षत्रियों के यहां शस्त्रों की पूजा होती है। ब्रज के मंदिरों में इस दिन विशेष दर्शन होते हैं। इस दिन नीलकंठ का दर्शन बहुत शुभ माना जाता है। यह त्योहार क्षत्रियों का माना जाता है। इसमें अपराजिता देवी की पूजा होती है। यह पूजन भी सर्वसुख देने वाला है। दशहरा या विजया दशमी नवरात्रि के बाद दसवें दिन मनाया जाता है। इस दिन राम ने रावण का वध किया था। रावण राम की पत्नी सीता का अपहरण कर लंका ले गया था। भगवान राम युद्ध की देवी मां दुर्गा के भक्त थे, उन्होंने युद्ध के दौरान पहले नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा की और दसवें दिन दुष्ट रावण का वध किया। इसके बाद राम ने भाई लक्ष्मण, भक्त हनुमान और बंदरों की सेना के साथ एक बड़ा युद्ध लड़कर सीता को छुड़ाया। इसलिए विजयादशमी एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण दिन है। इस दिन रावण, उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद के पुतले खुली जगह में जलाए जाते हैं। कलाकार राम, सीता और लक्ष्मण के रूप धारण करते हैं और आग के तीर से इन पुतलों को मारते हैं जो पटाखों से भरे होते हैं। पुतले में आग लगते ही वह धू-धू कर जलने लगता है और इनमें लगे पटाखे फटने लगते हैं और जिससे इनका अंत हो जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है…

दशहरा उत्सव की उत्पत्ति

दशहरा उत्सव की उत्पत्ति के विषय में कई कल्पनाएं की गई हैं। भारत के कतिपय भागों में नए अन्नों की हवि देने, द्वार पर धान की हरी एवं अनपकी बालियों को टांगने तथा गेहूं आदि को कानों, मस्तक या पगड़ी पर रखने के कृत्य होते हैं। अतः कुछ लोगों का मत है कि यह कृषि का उत्सव है। कुछ लोगों के मत से यह रणयात्रा का द्योतक है क्योंकि दशहरा के समय वर्षा समाप्त हो जाती है, नदियों की बाढ़ थम जाती है, धान आदि कोष्ठागार में रखे जाने वाले हो जाते हैं।

संभवतः यह उत्सव इसी दूसरे मत से संबंधित है। भारत के अतिरिक्त अन्य देशों में भी राजाओं के युद्ध प्रयाण के लिए यही ऋतु निश्चित थी। शमी पूजा भी प्राचीन है। वैदिक यज्ञों के लिए शमी वृक्ष में उगे अश्वत्थ (पीपल) की दो टहनियों (अरणियों) से अग्नि उत्पन्न की जाती थी। अग्नि शक्ति एवं साहस की द्योतक है, शमी की लकड़ी के कुंदे अग्नि उत्पत्ति में सहायक होते हैं, जहां अग्नि एवं शमी की पवित्रता एवं उपयोगिता की ओर मंत्रसिक्त संकेत हैं। इस उत्सव का संबंध नवरात्र से भी है क्योंकि इसमें महिषासुर के विरोध में देवी के साहसपूर्ण कृत्यों का भी उल्लेख होता है और नवरात्र के उपरांत ही यह उत्सव होता है।

रामलीला

दशहरा उत्सव में रामलीला भी महत्त्वपूर्ण है। रामलीला में राम, सीता और लक्ष्मण के जीवन के वृत्तांत का वर्णन किया जाता है। रामलीला नाटक का मंचन देश के विभिन्न क्षेत्रों में होता है। यह देश में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। बंगाल और मध्य भारत के अलावा दशहरा पर्व देश के अन्य राज्यों में क्षेत्रीय विषमता के बावजूद एक समान उत्साह और शौक से मनाया जाता है। उत्तरी भारत में रामलीला के उत्सव दस दिनों तक चलते रहते हैं और आश्विन माह की दशमी को समाप्त होते हैं, जिस दिन रावण एवं उसके साथियों की आकृति जलाई जाती है। इसके अतिरिक्त इस अवसर पर और भी कई प्रकार के कृत्य होते हैं, यथा हथियारों की पूजा, दशहरा या विजयादशमी से संबंधित वृत्तियों के औजारों या यंत्रों की पूजा।

पौराणिक मान्यताएं

इस अवसर पर कहीं-कहीं भैंसे या बकरे की बलि दी जाती है। भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व देशी राज्यों में, यथा बड़ोदा, मैसूर आदि रियासतों में विजयादशमी के अवसर पर दरबार लगते थे और हौदों से युक्त हाथी दौड़ते तथा उछलकूद करते हुए घोड़ों की सवारियां राजधानी की सड़कों पर निकलती थीं और जुलूस निकाला जाता था। प्राचीन एवं मध्य काल में घोड़ों, हाथियों, सैनिकों एवं स्वयं का नीराजन उत्सव राजा लोग करते थे।

वनस्पति पूजन

विजयदशमी पर दो विशेष प्रकार की वनस्पतियों के पूजन का महत्त्व है। एक है शमी वृक्ष, जिसका पूजन रावण दहन के बाद करके इसकी पत्तियों को स्वर्ण पत्तियों के रूप में एक-दूसरे को ससम्मान प्रदान किया जाता है। इस परंपरा में विजय उल्लास पर्व की कामना के साथ समृद्धि की कामना करते हैं। दूसरा है अपराजिता। यह पौधा अपने नाम के अनुरूप ही है। यह विष्णु को प्रिय है और प्रत्येक परिस्थिति में सहायक बनकर विजय प्रदान करने वाला है। नीले रंग के पुष्प का यह पौधा भारत में सुलभता से उपलब्ध है। घरों में समृद्धि के लिए तुलसी की भांति इसकी नियमित सेवा की जाती है। मेला दशहरा पर्व को मनाने के लिए जगह-जगह बड़े मेलों का आयोजन किया जाता है। यहां लोग अपने परिवार, दोस्तों के साथ आते हैं और खुले आसमान के नीचे मेले का पूरा आनंद लेते हैं। मेले में तरह-तरह की वस्तुएं, चूडि़यों से लेकर खिलौने और कपड़े बेचे जाते हैं। इसके साथ ही मेले में व्यंजनों की भी भरमार रहती है।

Saturday, 9 October 2021

टीकमगढ़ में लोकायुक्त की कार्रवाई, एक लाख रुपए घूस लेते गिरफ्तार

टीकमगढ़ में लोकायुक्त की कार्रवाई, एक लाख रुपए घूस लेते गिरफ्तार

भोपाल
टीकमगढ़ एमपीईबी का कार्यपालन अभियंता अखिलेश प्रसाद त्रिवेदी को लोकायुक्त पुलिस सागर ने एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। त्रिवेदी ने 50 हजार रुपए नकद लिए और रिश्वत के बाकी के 50 हजार रुपए का चेक लिया। त्रिवेदी ने 6 महीने के भीतर फरियादी द्वारा रुपए देने पर चेक वापस करने का वादा किया गया था। टीकमगढ़ जिले के गांव रानीगंज के रहने वाले किशोर सिंह दांगी ने एसपी लोकायुक्त सागर रामेश्वर यादव को शिकायत की थी कि उसकी गांव में चक्की है, कोरोना के कारण वह बिल जमा नहीं कर सका। कुछ दिनों पहले एमपीईबी की फ्लार्इंग स्क्वॉड ने उसके यहां पर चार लाख रुपए की बिजली का बिल निकाल दिया। जिस पर उसने इतनी रकम जमा करने में असमर्थता जताई।

एमपीईबी के ईई से मिलने पर दांगी से कहा गया कि प्रकरण को दो लाख रुपए का कर देंगे, लेकिन बचे हुए दो लाख में से 1 लाख रुपए ईई को देना होंगे। जब दांगी ने एक लाख रुपए नहीं होने की बात की तो ईई की तरफ से कहा गया कि 50 हजार रुपए नकद दे और 50 हजार रुपए का चेक दें और 6 महीने के अंदर रुपए देने पर अपना चेक वापस ले जाएं। इस शिकायत की पुष्टि करने के बाद आज सुबह लोकायुक्त पुलिस टीकमगढ़ पहुंची। जहां पर त्रिवेदी के सुभाष कॉलोनी स्थित आवास पर जैसे ही दांगी ने उन्हें 50 हजार रुपए दिए और 50 हजार रुपए का चेक दिया, वैसे ही लोकायुक्त पुलिस की निरीक्षक मंजू सिंह और स्टॉफ ने उन्हें दबोच लिया।

मध्यप्रदेश में पिछले कुछ दिनों ने करप्शन के खिलाफ मुहिम तेजी से चलाई जा रही है। कुछ दिनों से रोज किसी ने किसी अधिकारी पर कार्रवाई की जानकारी आ रही है। गुरुवार को ही शिवपुरी में सहकारी समिति के सहायक प्रबंधक के घर ईओडब्ल्यू की रेड में पांच करोड़ से ज्यादा की संपत्ति मिली है। इससे पहले (ईओडब्ल्यू) ने देवास जिले में वन विभाग के रेंजर को एक सरपंच से 20,000 रुपये की रिश्वत लेते बुधवार को रंगे हाथों पकड़ा। ईओडब्ल्यू ने रेंजर की संपत्तियों की जांच शुरू करते हुए उसके घर से 2.24 लाख रुपये की नकदी भी जब्त की है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि योजनाओं में पैसे लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इसके चलते भी कार्रवाई में तेजी आई है।

यूपी: स्टाफ नर्स के 2400+ पदों पर भर्तियां, 20 अक्टूबर से शुरू होंगे आवेदन

यूपी: स्टाफ नर्स के 2400+ पदों पर भर्तियां, 20 अक्टूबर से शुरू होंगे आवेदन


नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय ग्राणीण स्वास्थ्य मिशन (UPNRHM) के तहत राज्य में स्टाफ नर्स के 2400+ पदों पर भर्ती के लिए योग्य इच्छुक अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह भर्ती कंट्रैक्ट बेस (संविदा) पर होगी। यूपी में स्टाफ नर्स की इस भर्ती से कुल 2445 रिक्त पदों पर योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। यूपीएनआरएचएम नर्स भर्ती 2021 के लिए, आवेदन प्रक्रिया, योग्यता, आवेदन शुल्क व आयु सीमा की विस्तृत जानकारी भर्ती नोटिफिकेशन में पाई जा सकेगी। इस भर्ती के सबंध में अभी शॉर्ट नोटिस जारी किया गया है। यूपी स्टाफ नर्स भर्ती 2021 के शॉर्ट नोटिस के अनुसार, स्टाफ नर्स के 2445 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 20 अक्टूबर 2021 से शुरू होगी और अभ्यर्थी 09 नवंबर 2021 को रात 11:59 तक आवेदन कर सकेंगे।  उम्मीद है कि स्टाफ नर्स भर्ती का विस्तृत विज्ञापन 20 अक्टूबर को ही जारी कर दिया जाएगा। अभ्यर्थियों को सलाह है कि नर्स भर्ती जुड़ अपडेट के लिए समय-समय पर livehindustan.com और  www.upnrhm.gov.in को विजिट करते रहें।

कृषि विभाग में मुख्यमंत्री कोविड-19 योजना में 22 सदस्यों को मिली अनुकम्पा नियुक्ति

   कृषि विभाग में मुख्यमंत्री कोविड-19 योजना में 22 सदस्यों को मिली अनुकम्पा नियुक्ति


भोपाल

किसान-कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा 22 परिवारों के पात्र सदस्यों को गुरुवार 7 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर जन-प्रतिनिधियों द्वारा नियुक्ति-पत्र सौंपे गये। उक्त नियुक्तियाँ मुख्यमंत्री कोविड-19 अनुकम्पा नियुक्ति योजना अंतर्गत की गई हैं।

कलेक्टर कार्यालय इंदौर, राजगढ़, उज्जैन, रीवा, सिवनी, झाबुआ, शिवपुरी, अशोकनगर, रतलाम इत्यादि जिला मुख्यालयों पर जन-प्रतिनिधियों द्वारा शासन के नियमों एवं प्रावधानों के अनुसार अनुकम्पा नियुक्ति-पत्र प्रदान किये। सागर संभाग में 5, जबलपुर में 4, उज्जैन में 3, भोपाल, इंदौर एवं ग्वालियर में 2-2 और शहडोल संभाग में एक अभ्यर्थी को अनुकम्पा नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया है। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार कोविड संकट काल में कर्त्तव्य निर्वहन के दौरान 22 विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों के आकस्मिक निधन से उनके एक-एक परिजन को अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की गई है।

कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार सभी 22 अभ्यर्थियों को सहायक ग्रेड-3 के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति दी गई है। इनमें सामान्य वर्ग के 11, अन्य पिछड़ा वर्ग के 7 और अनुसूचित-जाति एवं जनजाति वर्ग के 2-2 अभ्यर्थियों को अनुकम्पा नियुक्ति दी गई। नौ आवेदकों को नियमित पदों के विरुद्ध, जबकि 13 आवेदकों को वित्त एवं सामान्य प्रशासन विभाग की अनुमति अनुसार सांख्येत्तर पदों के विरुद्ध अनुकम्पा नियुक्ति दी गई है।

Wednesday, 6 October 2021

नवदुर्गा उत्सव में गरबा भी होगा और डीजे भी बजेगा, लेकिन दस बजे तक

 नवदुर्गा उत्सव में गरबा भी होगा और डीजे भी बजेगा, लेकिन दस बजे तक


Shivraj Cabinet Decisions: नवदुर्गा उत्सव में गरबा भी होगा और डीजे भी बजेगा, लेकिन दस बजे तक

Tuesday, 5 October 2021

19 जिलों के 3000 ग्रामों में होगा भू-अधिकार अभिलेख का वितरण:राजस्व मंत्री राजपूत

19 जिलों के 3000 ग्रामों में होगा भू-अधिकार अभिलेख का वितरण:राजस्व मंत्री राजपूत

 

भोपाल

राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश के 19 जिलों के 3000 ग्रामों में स्वामित्व योजना के तहत एक लाख 71 हजार हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख का वितरण किया जाएगा। बताया कि 6 अक्टूबर को जन-कल्याण और सुराज अभियान के तहत हरदा में राज्य स्तरीय कार्यक्रम होगा भौतिक रूप से भूमि अधिकार पत्रों का वितरण होगा। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल होंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे।

अधिकार-पत्रों का होगा भौतिक वितरण

मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 24 अप्रैल 21 को प्रदेश के 1399 ग्रामों में अधिकार अभिलेख का वितरण कोरोना महामारी के कारण इलेक्ट्रॉनिक रूप में किया गया था, जिसका 6 अक्टूबर को भौतिक रूप से वितरण किया जाएगा। प्रदेश में इस योजना का क्रियान्वयन तीन चरणों में 10-10 जिलों को शामिल कर क्रमबद्ध रूप से प्रारंभ किया गया हैं।

24 जिलों में 24 ड्रोन बना रहे नक्शे

राजपूत ने बताया कि स्वामित्व योजना में सर्वे ऑफ इंडिया की सहायता से ग्रामों में बसाहट क्षेत्र पर ड्रोन के माध्यम से नक्शें का निर्माण तथा डोर-टॅ-डोर सर्वे कर अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया जा रहा है। अभी तक प्रदेश के 42 जिलों में सर्वेक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।24 ड्रोन 24 जिलों में कार्य रह रहे हैं इनमें से 6500 ग्रामों में ड्रोन कार्य पूर्ण कर चुके हैं।

नियमों का किया सरलीकरण

मंत्री राजपूत ने बताया कि हितग्राहियों को योजना का अधिक से अधिक लाभ प्रदान करने के लिए सर्वे के नियमों का आज की आवश्यकता के अनुसार सरलीकरण किया गया है। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों को विधिक दस्तावेज का दर्जा, सर्वे को समय सीमा में पूर्ण करना, अभिलेखों को पारदर्शिता के साथ तैयार करना, सर्वे प्रक्रिया को ऑन लाइन करना और एप्प के माध्यम सर्वेक्षक मौके पर धारक का नाम जोड़ सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली और अन्य राज्यों ने इसे अपने यहाँ लागू करने के लिए प्रक्रिया का अवलोकन भी किया है।

बाढ़ राहत के रूप में 163.28 करोड़ की राशि वितरित

बाढ़ राहत के रूप में 163.28 करोड़ की राशि वितरित

 

भोपाल

ग्वालियर, चंबल एवं मुरैना संभाग में विगत अगस्त माह में अतिवृष्टि से आई बाढ़ के कारण पीड़ितों को उनकी क्षतिपूर्ति के रूप में 163.28 करोड़ की राहत राशि वितरित की गई। इसमें अकेले श्योपुर के प्रभावित 6 गाँवों में 4 करोड़ 34 लाख 19 हजार रुपये की राशि राहत प्रभावितों के खाते में अंतरित की गई।

श्योपुर के ग्राम बासोद, लोहाड़, धर्मपुरा, बिदाखेड़ली, विचगावड़ी और धानोद ग्राम में गंभीर प्रकार की क्षतिपूर्ति के लिये 71 लाख 11 हजार 400 रुपये, सामान्य क्षतिपूर्ति के रूप में एक करोड़ 23 लाख 30 हजार रुपये, आंशिक क्षतिपूर्ति के रूप में 74 लाख 90 हजार 800 रुपये एवं पूर्ण क्षति वाले प्रकरणों में 2 करोड़ 20 लाख 76 हजार 500 रुपये पात्र लोगों को वितरित किये गये।

राहत राशि के रूप में बासोदा ग्राम में 709, लोहाड़ ग्राम में 763, धर्मपुरा गाँव में 247, बिदाखेड़ली में 247, विचगावड़ी में 540 और धानौद ग्राम में 163 प्रभावितों को क्षतिपूर्ति राशि वितरित की गई। श्योपुर जिले के इन 6 गाँव के 2669 हितग्राहियों को 4 करोड़ 34 लाख 19 हजार रुपये की राशि वितरित जा चुकी है।