उत्तम प्रदेश समाचार : विज्ञान - टेक्नोलॉजी

Breaking
Loading...
Menu

Tuesday, 5 October 2021

वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में दिखा 'दैत्याकार' धूमकेतु

वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में दिखा 'दैत्याकार' धूमकेतु

 


वैज्ञानिकों ने इस साल जून में सौर मंडल के बाहरी किनारे पर एक धूमकेतु को देखा था। इस धूमकेतु का नाम बर्नार्डिनेली-बर्नस्टीन (Bernardinelli-Bernstein) है। इस विशालकाय धूमकेतु का आकार 60 से 120 मील लंबा था। कुछ रिपोर्ट्स दावा कर रही हैं कि यह अब तक का देखा गया सबसे बड़ा धूमकेतु है। अगर धूमकेतु की लंबाई इसके अधिकतम बिंदु तक है तो इसका आकार लंदन से बर्मिंघम तक फैला होगा।
धूमकेतु की दुनिया में सबसे अधिक प्रसिद्ध 'हेली धूमकेतु' की लंबाई 3.5 मील थी। Pennsylvania यूनिवर्सिटी के Gary Bernstein ने कहा कि हमने अब तक का सबसे बड़ा धूमकेतु खोजा है या अब तक का सबसे बड़ा धूमकेतु है जिस पर अध्ययन किया गया। सबसे बड़े धूमकेतु की खोज का सौभाग्य मिला है। इसकी खोज पास आने और गर्म होने से पहले ही कर ली गई है ताकि मानव इसके विकास को देख सकें।

2031 में सूर्य के नजदीक से गुजरेगा

वैज्ञानिकों ने कहा कि यह धूमकेतु पृथ्वी के लिए किसी तरह का खतरा नहीं है। न्यूयॉर्क पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी है कि यह कम से कम 2031 में सूर्य को 10.71 astronomical units की दूरी से पार करेगा। यह धूमकेतु Oort Cloud नाम के हिस्से से आ रहा है जिसे स्टडी करना अपने आप में बेहद अहम है और सौर मंडल के कई रहस्यों को उजागर भी कर सकता है।

30 लाख साल से सौर मंडल में नहीं किया प्रवेश

यह धूमकेतु 30 लाख साल से सौर मंडल में नहीं आया है। सौर मंडल के बाहरी हिस्से के बारे में अभी हमें ज्यादा जानकारी नहीं है। इसलिए वहां से आने वाले ऑब्जेक्ट्स में वैज्ञानिकों की दिलचस्पी ज्यादा रहती है। इसका आकार 155 किमी डायमीटर का है लेकिन दूरी की वजह से टेलिस्कोप की मदद से ही दिखेगा। इसे स्टडी करना इसलिए खास है क्योंकि माना जाता है कि ये बर्फीली चट्टानें सौर मंडल के 4.5 अरब साल पहले बनने के बाद से अब तक ज्यादा बदली नहीं है। इसकी केमिकल बनावट के आधार पर शुरुआती सौर मंडल के बारे में भी जानने को मिलेगा।

Saturday, 25 September 2021

अग्नि-5 की जद में होगा पूरा चीन और पाकिस्तान, भारत को अगले महीने मिल जाएगी महामिसाइल

अग्नि-5 की जद में होगा पूरा चीन और पाकिस्तान, भारत को अगले महीने मिल जाएगी महामिसाइल

 


 नई दिल्ली 
भारत अपनी पहली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 (अग्नि-V) को टेस्ट करने को पूरी तरह से तैयार है। पांच हजार किलोमीटर रेंज वाले इस मिसाइल का परीक्षण अब अक्टूबर में किए जाने की संभावना है। पहले कहा गया था कि 23 सिंतबर को इसका टेस्ट होगा। यह मिसाइल सभी एशियाई देशों सहित अफ्रीका और यूरोप के कुछ हिस्से को भी भेदने में सक्षम है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि अग्नि-V मिसाइल चीन की राजधानी बीजिंग सहित घनी आबादी वाले क्षेत्र को भी भेदने में सक्षम है।


दरअसल, भारत की अग्नि-5 मिसाइल 5000 किलोमीटर तक हमला करने में सक्षम है। अगर इसका टेस्ट सफल होता है तो भारत को अगले महीने यह महामिसाइल मिल जाएगी। इसके चलते यह चीन, पाकिस्तान और पूरे यूरोप को अपने जद में ले सकती है। भारत अगर इस मिसाइल को दागता है तो वह पूरे एशिया, यूरोप, अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक हमला कर सकता है। भारत के इस टेस्ट से चीन आग बबूला हो गया है। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट मुताबिक, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि दक्षिण एशिया में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना सभी पक्षों के हित में है। चीन को उम्मीद है कि सभी पक्ष इसको लेकर रचनात्मक कदम उठाएंगे।

 अग्नि-5 मिसाइल की क्या है खासियतें
-यह मिसाइल 17 मीटर लंबी, 02 मीटर चौड़ी और 50 टन वजनी है। 
-यह एक साथ कई लक्ष्यों पर निशाना साधने में भी सक्षम है। 
- अग्नि-5 भारत की पहली और एकमात्र अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है।
- इस रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बनाया है।
- अग्नि- 5 बैलिस्टिक मिसाइल एक साथ कई हथियार ले जाने में सक्षम है।
- एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए लांच की जा सकती है।
- यह मिसाइल डेढ़ टन तक न्यूक्लियर हथियार अपने साथ ले जा सकती है।

ध्वनि की गति से 24 गुना ज्यादा रफ्तार
- इसकी रफ्तार मैक 24 है, यानी ध्वनि की गति से 24 गुना ज्यादा
- 8.16 किलोमीटर की दूरी तय करती है एक सेकेंड में
- 29,401 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दुश्मन पर हमला करती है
- मिसाइल में तीन स्टेज के रॉकेट बूस्टर हैं जो सॉलिड फ्यूल से उड़ते हैं


कहीं से भी लांच हो सकती है
- अग्नि-5 के लॉन्चिंग प्रणाली में कैनिस्टर तकनीक का इस्तेमाल हुआ है
- लॉन्च करने के लिए मोबाइल लॉन्चर का उपयोग किया जाता है
- इस वजह से इस मिसाइल को कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है
- इस्तेमाल बेहद आसान है, इस वजह से देश में कहीं भी तैनाती हो सकती है

दागो और भूल जाओ
- सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल में दागो और भूल जाओ वाली प्रणाली है
- इसका आसानी से पता नहीं लगाया जा सकता क्योंकि यह बैलिस्टिक प्रक्षेपवक्र का अनुसरण करती है
- इसमें रिंग लेजर गाइरोस्कोप इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, जीपीएस, सैटेलाइट गाइडेंस सिस्टम लगा है

अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल से लैस आठवां देश
फिलहाल दुनिया के मुट्ठीभर देशों के पास ही इंटर अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) हैं। इनमें रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस, इजरायल, ब्रिटेन, चीन और उत्तर कोरिया शामिल हैं। भारत इस ताकत से लैस होने वाला दुनिया का 8वां देश होगा।

Thursday, 16 September 2021

मिसाइलों का सामना करने भारत बना रहा 'रॉकेट फोर्स', चीन-पाक की चाल रह जाएगी धरी

मिसाइलों का सामना करने भारत बना रहा 'रॉकेट फोर्स', चीन-पाक की चाल रह जाएगी धरी

 

 नई दिल्ली 
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बिपिन रावत ने उत्तरी सीमा पर चीन के आक्रामक रवैये और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी तमाम चुनौतियों के बीच बुधवार को कहा कि भारत ने वायु क्षेत्र में अपनी शक्ति मजबूत करना शुरू कर दिया है और इसके तहत देश 'रॉकेट फोर्स' तैयार करने पर विचार कर रहा है। 

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रावत ने पाकिस्तान को चीन का प्रॉक्सी करार दिया और कहा कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में छद्म युद्ध यानी प्रॉक्सी वॉर जारी रखेगा तथा यह पंजाब और देश के अन्य हिस्सों में भी दिक्कतें पैदा करने की कोशिश कर रहा है। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष ने उत्तरी सीमाओं पर चीन के आक्रामक रुख को रेखांकित करते हुए कहा, 'चाहे वह प्रत्यक्ष आक्रामकता हो या तकनीक के जरिए हो, हमें हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा और यह तैयारी तभी हो सकती है जब हम साथ काम करेंगे।' उन्होंने कहा कि कूटनीति, सूचना, सैन्य और आर्थिक कौशल के बाद टेक्नोलॉजी को राष्ट्रीय शक्ति का पांचवां स्तंभ माना जाना चाहिए।

भारत की वायु शक्ति को मज़बूत बनाने के कदमों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'हम रॉकेट फोर्स तैयार करने की तरफ देख रहे हैं।' हालांकि उन्होंने इस योजना के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी। वहीं अफगानिस्तान की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि किसी ने कभी ऐसा नहीं सोचा था कि तालिबानइतनी तेजी से देश पर कब्जा कर लेगा। उन्होंने कहा कि यह तो समय ही बताएगा कि आगे क्या होगा। इस मौके पर पूर्व रक्षा सचिव एनएन वोहरा ने चीन के साथ 1962 के युद्ध से संबंधित हेंडरसन ब्रुक्स रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की अनुमति दिए जाने का आह्वान किया।

Thursday, 12 August 2021

तकनीकी खराबी के कारण GSLV-F10/ISRO EOS-03 मिशन नहीं हुआ पूरी तरह सम्पन्न

तकनीकी खराबी के कारण GSLV-F10/ISRO EOS-03 मिशन नहीं हुआ पूरी तरह सम्पन्न

 


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का जीएसएलवी रॉकेट द्वारा भू्-अवलोकन उपग्रह को स्थापित करने का मिशन रॉकेट के ‘क्रायोजेनिक चरण (कम तापमान बनाकर रखने संबंधी)’ में खराबी आने के कारण पूरी तरह से सम्पन्न नहीं किया जा सका।

एजेंसी के अनुसार, 51.70 मीटर लंबे रॉकेट जीएसएलवी-एफ10/ईओएस-03 ने 26 घंटे की उलटी गिनती के समाप्त होने के तुरंत बाद सुबह पांच बजकर 43 मिनट पर श्रीहरिकोटा के दूसरे लॉंच पैड (प्रक्षेपण स्थल)से सफलतापूर्वक उड़ान भरी थी। ‘मिशन कंट्रोल सेंटर’ के वैज्ञानिकों ने बताया कि उड़ान भरने से पहले, ‘लॉन्च ऑथराइजेशन बोर्ड’ ने योजना के अनुसार सामान्य उड़ान भरने के लिए मंजूरी दी थी। पहले और दूसरे चरण में रॉकेट का प्रदर्शन सामान्य रहा। कुछ मिनटों बाद हालांकि, वैज्ञानिकों को चर्चा करते देखा गया और रेंज ऑपरेशन्स निदेशक द्वारा मिशन कंट्रोल सेंटर में घोषणा की गई कि ‘‘ कुछ खराबी के कारण मिशन पूरी तरह से सम्पन्न नहीं हो सका।’’

‘मिशन कंट्रोल सेंटर’ में रेंज ऑपरेशन्स निदेशक की घोषणा की, ‘‘ क्रायोजेनिक चरण में, प्रदर्शन में विसंगति देखी गई। मिशन पूरी तरह से सम्पन्न नहीं हो सका।’’ बाद में इसरो के अध्यक्ष के सिवन ने भी इस बात की पुष्टि की। इस अभियान का उद्देश्य नियमित अंतराल पर बड़े क्षेत्र की वास्तविक समय पर तस्वीरें उपलब्ध कराना, प्राकृतिक आपदाओं की त्वरित निगरानी करना और कृषि, वनीकरण, जल संसाधनों तथा आपदा चेतावनी प्रदान करना, चक्रवात की निगरानी करना, बादल फटने आदि के बारे में जानकारी प्राप्त करना था।