उत्तम प्रदेश समाचार

Breaking
Loading...
Menu

Friday, 22 October 2021

बांग्लादेश हिंसा: आखिरकार पकड़ा गया हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने वाला इकबाल

बांग्लादेश हिंसा: आखिरकार पकड़ा गया हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने वाला इकबाल

 

 ढाका 
बांग्लादेश के दुर्गा पूजा के पंडालों में हुए हमलों में और हिंसा मामले में बांग्लादेश की कोमिला पुलिस ने हिंसा भड़काने के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। ढाका ट्रिब्यून ने कोमिला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) फारुक अहमद का हवाला देते कहा कि बांग्लादेश पुलिस ने कोमिला और अन्य स्थानों पर हालिया हिंसा को भड़काने के लिए जिम्मेदार इकबाल हुसैन की पहचान के कुछ घंटों बाद उसे गुरुवार को कॉक्स बाजार से गिरफ्तार किया गया। पुलिस अधिकारी के अनुसार, आरोपी इकबार हुसैन को कल रात लगभग 10:10 बजे कॉक्स बाजार के शुगंधा समुद्र तट क्षेत्र से पकड़ा गया। इकबाल पर आरोप है कि उसने ही पहले इस्लामिक पवित्र पुस्तक कुरान को दुर्गा पूजा स्थल पर रखा था, जो हिंसा का कारण बना। बांग्लादेश के दुर्गा पूजा के पंडालों में हुए हमलों में कम से कम तीन लोगों की जान चली गई थी। 

गुरुवार को ही बांग्लादेश की कोमिला पुलिस ने दावा किया था कि सीसीटीवी में हिंसा भड़काने के पीछे जो व्यक्ति जिम्मेदार था, उसकी पहचान कर ली गई है। पुलिस ने इस मामले में 35 साल के इकबाल हुसैन से पूछताछ की थी और फिर बाद में गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले मंगलवारको बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के निर्देश देश के गृह मंत्री को दिए थे।। मंगलवार को उन्होंने गृहमंत्री से कहा था कि वह उन लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई शुरू करें, जिन्होंने धर्म का इस्तेमाल कर हाल में हिंसा भड़काई थीं। 
 
क्या है मामला
गौरतलब है कि बीते बुधवार से बांग्लादेश में हिंदुओं के मंदिरों पर हमले बढ़ गए हैं। दरअसल, इससे पहले दुर्गा पूजा समारोहों के दौरान सोशल मीडिया पर कथित तौर पर ईश निंदा करने वाला एक पोस्ट देखने को मिला था। शनिवार देर रात बांग्लादेश में एक भीड़ ने 66 मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया और कम से कम 20 मकानों को आग के हवाले कर दिया। वहीं स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक अलग-अलग हमलों में हिंदू समुदाय के छह लोग मारे गए हैं, लेकिन इस आंकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने जज को ठहराया महिला से रेप और धोखाधड़ी का दोषी

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने जज को ठहराया महिला से रेप और धोखाधड़ी का दोषी

 

जम्मू

जम्मू-कश्मीर में एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने महिला से बलात्कार और धोखाधड़ी के एक मामले में जज को दोषी ठहराया है। जम्मू में एक निलंबित उप-न्यायाधीश पर 2018 में उनसे कानूनी मदद मांगने वाली एक महिला से बलात्कार और धोखाधड़ी का आरोप लगा था। आरोप के बाद उप-न्यायाधीश को निलंबित कर दिया गया था। निलंबित सब जज की पहचान राकेश कुमार अबरोल के रूप में हुई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट जम्मू के पीठासीन अधिकारी खलील चौधरी ने अपने फैसले में कहा कि चर्चा से जो निष्कर्ष निकलता है, वह यह है कि रिकॉर्ड पर मौजूद सभी सबूत आरोपी के अपराध की ओर इशारा करते हैं। कोर्ट ने कहा कि घटनाओं और तथ्यों की पूरी श्रृंखला इस ओर इशारा करता है कि आरोपी द्वारा किए गए सभी अपराध मानवीय संभावनाओं के अंतर्गत किया गया था और रिकॉर्ड पर लाए गए और स्थापित सभी परिस्थितियां आरोपी के अपराध के अनुरूप हैं।

 

अदालत ने साक्ष्यों पर कहा कि यह पीड़िता के साथ बलात्कार के लिए पूरी तरह से उत्तरदायी प्रतीत होता है। इस प्रकार, उन्हें धारा 420 और 376 (2) (के) आरपीसी के तहत अपराधों के लिए दोषी ठहराया जाता है। कोर्ट में सजा पर शनिवार को सुनवाई होगी। अदालत ने आगे कहा प्रभावी व्यक्ति, उनकी पहुंच, प्रभाव और अधिकार को ध्यान में रखते हुए, वे आम जनता या उस विशिष्ट वर्ग पर होते हैं, जिससे वे संबंधित हैं और उन्हें अधिक जिम्मेदार होना चाहिए, उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अनुभव और ज्ञान के साथ अधिकार और कानून का अर्थ जानते हैं और समझते हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार रामबन निवासी पीड़ित महिला की और जज की मुलाकात उस समय हुई जब वह एक केस लड़ रही थी। न्यायिक अधिकारी होने के नाते, अबरोल ने कानूनी मदद का वादा किया और उससे घरेलू कार्यों में हाथ बटाने की बात कही। एक नाबालिग लड़की को सहारा देने के बाद महिला ने जज के घर काम करना शुरू कर दिया। जज ने महिला को उसकी बेटी को बेहतर शिक्षा देने का वादा भी किया। भियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी ने उसे 5000 रुपए प्रति माह वेतन देने का वादा भी किया था।

फ्री में चिकन न देने पर तोड़ दी टांग, सिंघु बॉर्डर से गिरफ्तार हुआ निहंग नवीन कुमार

फ्री में चिकन न देने पर तोड़ दी टांग, सिंघु बॉर्डर से गिरफ्तार हुआ निहंग नवीन कुमार

 

नई दिल्ली 
सिंघु बॉर्डर पर किसानों के मंच के पास निहंग सिखों द्वारा एक युवक की नृशंस हत्या का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि आज मुफ्त चिकन न देने पर एक मजदूर से मारपीट और टांग तोड़ने का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है। हरियाणा पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सोनीपत के सिंघु बॉर्डर पर मुफ्त में चिकन देने से मना करने पर एक मजदूर के साथ मारपीट करने और उसकी टांग तोड़ने के आरोप में एक निहंग नवीन कुमार को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। 
 
बता दें कि सिंघु बॉर्डर पर शुक्रवार को पंजाब के तरनतारन जिले के निवासी लखबीर सिंह (36) की हत्या कर दी गई। उसका शव धरना-प्रदर्शन स्थल से कुछ दूरी पर बैरिकेड से लटका मिला था। मृतक का एक हाथ कटा हुआ था। मृतक का संबंध निहंग समूह से बताया जाता है। हत्या की वजह एक धर्म ग्रंथ की बेअदबी को लेकर हुआ विवाद माना जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में केंद्र द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर हजारों की संख्या में किसान दिल्ली सीमा के तीन बिंदुओ- टिकरी, सिंघू और गाजीपुर- पर गत 10 महीने से प्रदर्शन कर रहे हैं। इन किसानों में अधिकतर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं। 

Saturday, 16 October 2021

राहुल द्रविड़ टीम टी-20 वर्ल्ड कप के बाद बन सकते हैं इंडिया के हेड कोच

 




 नई दिल्ली 
भारत के पूर्व बल्लेबाज राहुल द्रविड़ टीम इंडिया का हेड कोच बनने के लिए तैयार हो गए हैं। गौरतलब है कि हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ लिमिटेड ओवरों की सीरीज में वो टीम इंडिया के साथ बतौर हेड कोच जुडे़ थे। मौजूदा कोच रवि शास्त्री का कार्यकाल टी-20 वर्ल्ड कप के बाद समाप्त हो रहा है। द्रविड़ टी-20 वर्ल्ड कप के बाद टीम इंडिया के हेड कोच का पद संभाल सकते हैं। टी-20 वर्ल्ड कप में भारत अपने अभियान की शुरुआत 24 अक्टूबर को पाकिस्तान के खिलाफ करेगा। विराट कोहली ने भी टी-20 वर्ल्ड कप के बाद टी-20 की कप्तानी छोड़ने का ऐलान किया है। 
 
सूत्रों ने बताया कि द्रविड़ ने कोच बनने के लिए अपनी सहमति दे दी है। उन्होंने कहा कि इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता है। विक्रम बल्लेबाजी कोच बने रहेंगे। उनके अलावा अन्य पदों पर ध्यान दिया जाएगा। भारतीय टीम अब बदलाव की राह पर है।  इसमें कई युवा खिलाड़ियों को शामिल होना है। इन सभी ने द्रविड़ के साथ काम किया है। भारतीय क्रिकेट के लिए ये काफी अहम हो सकता है।
 
 राहुल द्रविड़ हमेशा से ही बीसीसीआई की पसंद थे। सूत्रों ने बताया कि बीसीसीआई सचिव जय शाह और अध्यक्ष सौरव गांगुली ने पूर्व कप्तान के साथ बैठकर बात की। चीजें अच्छी रहीं। द्रविड़ ने हमेशा भारतीय क्रिकेट के हित को शीर्ष पर रखा। इसलिए चीजें आसान हो गई। जब राहुल द्रविड़ जैसा खिलाड़ी टीम इंडिया का मार्गदर्शन करेगा, तो टीम इंडिया बेहतर करेगी। 

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में "ज़ायका" का शुभारंभ

 



भोपाल

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल द्वारा संग्रहालय भ्रमण पर आने वाले दर्शकों की मांग पर भील जनजाति के  पारंपरिक भोजन कार्यक्रम जायका की शुरूआत की गयी है। इस भोजन को भोपाल शहर के भोजन प्रेमी लोगों ने काफी पसंद किया है। इस संबंध में निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने बताया कि पिछले दो दशकों में विश्व के तमाम बड़े वैज्ञानिकों ने अपने शोध से ये साबित भी किया है कि जनजातियों के प्राकृतिक आहार को यदि आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में लोग अपना लें, तो पोषक तत्वों की कमी से होने वाले अनेक रोगों की छुट्टी हो सकती है। मक्के की रोटी का सेवन करने से हमारे शरीर को फाइबर प्राप्त होता है, जो पाचन संबंधी समस्याओं से राहत पाने में मदद करता है। यह शरीर में कॉलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। साथ ही फाइबर युक्त आहार लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है।

संग्रहालय की केंटिन मे प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को दोपहर 1 बजे से 4 बजे के मध्य स्वाद प्रेमियों के लिए मध्यप्रदेश के भील जनजाति का पारंपरिक भोजन मक्का की रोटी, बैगन का भुर्ता, धनिया, लेहसुन की चटनी, गुड आदि पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर उपलब्ध है। जानकारी के लिए  मो. नं. 9479438303  पर संपर्क किया जा सकता है।

दीपावली के पूर्व 2.51 लाख आवासहीन परिवारों को मिलेगी अपने आवास की सौगात



भोपाल

मध्यप्रदेश में आवास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का प्रभावी क्रियान्वयन करते हुए 21 लाख 5 हजार आवास बना लिए गए हैं। वित्त वर्ष 2021-22 में प्रदेश के कुछ जिलों में अतिवृष्टि के बावजूद वर्षाकाल की तिमाही में सबसे ज्यादा एक लाख 60 हजार आवास बना लिए गए। योजना में मध्यप्रदेश को मिले 26.28 लाख आवास गृह बनाने के लक्ष्य के मुकाबले प्राप्त उपलब्धि संतोषजनक ही नहीं गरीबों को आवास गृह दिलवाने की दृष्टि से सराहनीय भी है। उल्लेखनीय बात यह है कि मध्यप्रदेश की तीन विशेष पिछड़ी जनजातियों बैगा, सहरिया और भारिया के लोगों के लिए भी विशेष परियोजना के अंतर्गत आवास गृह उपलब्ध करवाए गए हैं। जीर्ण-शीर्ण घरों में रहने वाले इन वर्गों के लोगों के लिए यह अकल्पनीय था कि उन्हें इतनी शीघ्र आवास गृह मिल जाएगा और दीपोत्सव वे नए घर में ही मना पाएंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2022 तक देश के सभी आवासहीन लोगों को आवास गृह उपलब्ध कराने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की पूर्ति में मध्यप्रदेश अच्छा कार्य कर रहा है। इस क्रम में आगामी सप्ताह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के 2 लाख 51 हजार हितग्राहियों को आवास गृह का एक साथ वर्चुअल गृह प्रवेश करवाएंगे। इस संबंध में आवश्यक तैयारियाँ की जा रही हैं। सबको आवास 2022 की लक्ष्य पूर्ति में मध्यप्रदेश ने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। जिन परिवारों को अपने मकान की सौगात मिली है, वे प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री चौहान के प्रति विशेष रूप से आभारी भी हैं। इस वर्ष दीपावली के पहले वे अपने नवनिर्मित आवास गृह में पहुँचने के लिए तैयार हो गए हैं। अब वे नए आवास गृह में ही दीपोत्सव मनाएंगे। मुख्यमंत्री चौहान का कहना है कि प्रदेश में हर गरीब परिवार को भूमि का पट्टा और पात्रतानुसार आवास निर्माण की राशि दी जाएगी।

कोरोना काल में भी नहीं रुका आवास बनाने का कार्य

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निरंतर समीक्षा करते हुए आवास योजनाओं के क्रियान्वयन की गति को बढ़ाने के साफ निर्देश दिए। इसके फलस्वरूप प्रदेश में कोरोना काल में भी आवास निर्माण का कार्य नहीं रूका। इस अवधि में 3 लाख से अधिक आवास गृह निर्मित किए गए। आमतौर पर एक आवास गृह के निर्माण के लिए औसतन 4 महीने का समय तय है, लेकिन पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने गरीबों के लिए पक्के मकान बनाने का कार्य तेजी से पूरा करते हुए एक माह के अल्प समय में 1 लाख आवास गृह बनाकर तैयार किए। आवास निर्माण की अवधि राष्ट्रीय स्तर पर 114 दिवस है। इस दृष्टि से मध्यप्रदेश में अच्छी गति के साथ आवास निर्माण के कार्य सम्पन्न हुए हैं। वर्षाकाल में यह संभव नहीं था लेकिन निर्माण एजेंसियों ने मनोयोगपूर्वक कार्य करते हुए इस उपलब्धि को हासिल किया है।

सॉफ्ट एप के माध्यम से हितग्राही के खाते में अंतरित होती है राशि

महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में उन लोगों को आवास गृह मिल गया है, जिनका अपना मकान नहीं था। योजना के प्रावधानों के अनुसार हितग्राही को मकान की इकाई लागत मैदानी क्षेत्र में एक लाख 20 हजार और दूरस्थ पहुँचविहीन दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में एक लाख 30 हजार रूपए शत-प्रतिशत अनुदान के रूप में प्रदान की जाती है। यह राशि आवास निर्माण के कार्य की प्रगति के आधार पर किश्तों के रूप में दी जाती है। हितग्राही द्वारा अपने मकान के निर्माण के लिए प्रदर्शित रूचि और परिश्रम के अच्छे परिणाम मिलते हैं। पूरा परिवार पक्के आवास गृह को पाकर अपने जीवन को सार्थक महसूस करता है। सॉफ्ट एप के माध्यम से जियो टेग, फोटो अपलोड होने पर स्वमेव हितग्राही के खाते में राशि का अंतरण हो जाता है। हितग्राही को किसी सरकारी दफ्तर का चक्कर नहीं लगाना पड़ता है। मकान के साथ ही स्वच्छ शौचालय का निर्माण किया जाता है। यही नहीं हितग्राही को उज्जवला योजना में एलपीजी गैस कनेक्शन भी प्रदान किया जाता है।

माशिम ने दसवीं व बारहवीं बोर्ड परीक्षा की तैयारियां शुरू की


भोपाल

 इस साल मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिम) ने दसवीं व बारहवीं बोर्ड परीक्षा की तैयारियां शुरू कर दी है। पिछले साल कोरोना काल के कारण परीक्षा नहीं हो पाई थी। इस साल माशिमं मार्च में परीक्षा कराने के प्रयास में है। इसके लिए परीक्षा केंद्रों की सूची भी जिले से मंगा ली गई है। इस बार हर जिले में 10 से 15 फीसद अधिक परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे, ताकि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षित शारीरिक दूरी का पालन हो सके।

इसके अलावा माशिमं ने सत्र 2021-22 से 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा के प्रश्नों के पैटर्न में बदलाव किया है। इस सत्र के प्रश्नपत्र में 40 फीसद अंकों के वस्तुनिष्ट प्रश्न पूछे जाएंगे। अभी तक माशिम की 10वीं व 12वीं की परीक्षा में 25 फीसद अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते थे। नए पैटर्न पर अभी हाल ही में नौवीं से बारहवीं की तिमाही परीक्षा भी ली गई, ताकि विद्यार्थी पहले से ही बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार हो जाएं।

इस बार तिमाही परीक्षा तीन के बदले ढाई घंटे की ली गई। इस कारण बोर्ड परीक्षा के समय में भी आधा घंटा कम होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, माशिमं के अधिकारी अभी इससे इन्कार कर रहे हैं। उनका कहना है कि अभी बोर्ड परीक्षा के समय को लेकर कोई निर्णय नहीं किया गया है। बता दें, कि अब 40 फीसद अंकों के प्रश्न सिर्फ वस्तुनिष्ट होंगे। इन सब बदलाव से विद्यार्थी आसानी से पास हो सकेंगे। माशिमं की परीक्षा में 33 फीसद अंक पर विद्यार्थियों को पास किया जाता है।

तालिबान से बचकर निकलीं 100 महिला फुटबॉल खिलाड़ी, परिवारों के साथ अफगानिस्तान से पहुंची कतर

तालिबान से बचकर निकलीं 100 महिला फुटबॉल खिलाड़ी, परिवारों के साथ अफगानिस्तान से पहुंची कतर

 



नई दिल्ली  
अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से महिलाएं खौफ में जी रही हैं। तालिबान महिलाओं के खिलाफ अपनी दमनकारी नीति के लिए जाना जाता है, यही कारण है नेशनल फुटबॉल टीम के सदस्यों समेत 100 महिला फुटबॉल खिलाड़ियों को अफगानिस्तान से निकाला गया है। गुरुवार को  फ्लाइट के जरिए उन्हें दोहा लाया गया है। कतर के सहायक विदेश मंत्री लोलवाह अल-खतर ने एक ट्वीट में कहा, "महिला खिलाड़ियों सहित लगभग 100 फुटबॉल खिलाड़ी और उनके परिवार बोर्ड में हैं।"


 बताया कि ग्रुप में कम से कम 20 राष्ट्रीय महिला टीम फुटबॉल खिलाड़ी शामिल हैं। निकलाने के साथ खिलाड़ियों को कोरोनो वायरस परीक्षण से गुजरने के लिए एक परिसर में ले जाया गया। यह साफ नहीं है कि वे कब तक कतर में रहेंगे।फुटबॉल की विश्व शासी निकाय फीफा, अफगानिस्तान से खिलाड़ियों को निकालने के लिए कतर सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के संघ, FIFPRO ने अगस्त में अफगानिस्तान महिला राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों के लिए काबुल से बाहर निकलने के लिए उड़ानों में सीट सुरक्षित करने में मदद की।

अगस्त में अफगान सरकार के गिरने के बाद तालिबान ने 20 साल बाद फिर देश पर अपना कब्जा कर लिया, जिसके बाद से महिला एथलीटों समेत सभी महिलाओं  की सुरक्षा के लिए चिंताएं उठाई गईं। अफ़ग़ान महिला फ़ुटबॉल टीम की पूर्व कप्तान, खालिदा पोपल ने अफगानिस्तान में खिलाड़ियों से अपने स्पोर्ट्स गियर को जलाने और तालिबान शासन के प्रतिशोध से बचने के लिए अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को हटाने का आग्रह किया था।
 
तालिबान के सत्ता में आने के बाद से देश की कई महिला फुटबॉल खिलाड़ी छिप गई हैं। उन्हें डर है कि अगर तालिबान को उनका पता चला तो वे उन्हें जिंदा नहीं छोड़ेंगे। अगस्त में तालिबान के देश पर कब्जा करने के तुरंत बाद, अफगानिस्तान की महिला राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की एक पूर्व खिलाड़ी फानूस बसीर भाग गई और उन्होंने कहा कि तालिबान शासन में उनका कोई भविष्य नहीं है।

उन्होंने कहा, "हमारे देश के लिए, हमारे भविष्य के लिए, अफगानिस्तान में महिलाओं के भविष्य के लिए हमारे बहुत सारे सपने थे। यह हमारा सबसे बुरा सपना था कि तालिबान आएंगे और पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लेंगे। महिलाओं के लिए कोई भविष्य नहीं है।" पिछले महीने, अफगानिस्तान की जूनियर राष्ट्रीय टीम की महिला खिलाड़ी सीमा पार करके पाकिस्तान चली गईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिलाओं को डरर था कि उनके अधिकारों पर कार्रवाई की जाएगी जिसके तहत लड़कियों ने हफ्तों तक छिपने का समय बिताया।